हर दिन 32 पुलिसवालों के खिलाफ आती हैं शिकायतें

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Saturday, January 04, 2014-4:01 PM

नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त भीमसेन बस्सी नए स्लोगन के साथ क्या पुलिस को बदल पाएंगे। खुद पुलिस के आंकड़े दर्शाते हैं कि पुलिस का चेहरा कैसा है। दिल्ली में हर दिन 32 पुलिसवालों के खिलाफ शिकायतें आती हैं। इनमें से 7 के खिलाफ एक्शन भी होता है। थानों में आम जनता से पुलिस का व्यवहार कोई छुपा नहीं है।

जानकारों का कहना है कि स्लोगन से नहीं बल्कि अच्छी ट्रेनिंग व काम का अच्छा माहौल देने से पुलिस बदल पाएगी। जब तीस-तीस साल तक तरक्की नहीं मिलेगी तो वह कुंठा के शिकार नहीं होंगे। 2-2 दिन तक लगातार ड्यूटी से उनका व्यवहार कैसे अच्छा होगा। दिल्ली पुलिस के वर्ष 2013 आंकड़े देखें तो कुल 62130 शिकायतें आईं। इनमें से 11836 पुलिस के खिलाफ आई। इनमें से 2256 के खिलाफ शो कॉज से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हुई। इनमें से 158 की विजीलैंस जांच, 1158 के खिलाफ शो कॉज नोटिस, 446 निलंबित व 794 के खिलाफ डी.ई. (विभागीय जांच) के आदेश हुए हैं।

ऐसा नहीं है कि यह आंकड़ा केवल पिछले साल का है। हर साल पुलिस के खिलाफ शिकायतों की भरमार रहती है। यह शिकायतें तो वह है जो पुलिस के पास आई है। इनके अलावा जन शिकायत आयोग, मानवाधिकार आयोग सहित अन्य विभागों में भी शिकायतों का ढेर है। इन मामलों में पुलिसवालों का कहना है कि सबको शिकायतें तो दिखती हैं, लेकिन कोई यह नहीं देखता है कि उनके साथ क्या व्यवहार हो रहा है। वह लोग 24 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते है। सिपाही-हवलदारों को तो 25 से 30 साल तक तरक्की तक नहीं मिलती है।

थानों में न अच्छा खाना, न कपड़े कुछ नहीं मिलता। थानों की बैरक में सोने के लिए जगह तक नहीं होती है।अधिकारियों का हर वक्त काम का दबाव रहता है। उपर से जनता ऐसी है कि सांप निकल जाए तो उसे पुलिस की मदद चाहिए।इस तरह के माहौल पुलिसकर्मी चिड़चिड़े हो जाते हैं। इतने मानसिक दबाव में गलती होना स्वाभाविक है। पुलिसकर्मियों की तरक्की का मामला शुक्रवार को पुलिस आयुक्त के सालाना संवाददाता सम्मलेन में भी उठा। इस मामले को आयुक्त यह कहकर टाल गए कि तदर्थ तरक्की दी गई।


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