आम चुनाव से पहले हो जाएगा तेलंगाना का गठन?

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Saturday, January 04, 2014-6:40 PM

हैदराबादः क्या पृथक तेलंगाना राज्य अप्रैल-मई माह में होने जा रहे आम चुनाव से पहले अस्तित्व में आ जाएगा? यह सवाल हर किसी के जेहन में उठ रहा है, लेकिन इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। यहां तक कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा राज्य विधानसभा को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2013 पर राय देने के लिए भेजे जाने के तीन सप्ताह के बाद भी चीजें एक इंच आगे नहीं बढ़ सकी हैं।

विधेयक पर अनिश्चितता बरकरार है क्योंकि विधेयक पर चर्चा शुरू करने के लिए शुक्रवार से विधानसभा का शीतकालीन सत्र बहाल तो हो गया, लेकिन सीमांध्र क्षेत्र (रायलसीमा और तटीय आंध्र) के वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के विधायक बाधा डालने पर आमादा हैं। सीमांध्र के विधायकों के बाधा डालने के कारण कोई भी विधायी कार्य नहीं हो पाया है। सदन का सत्र 23 जनवरी को समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रपति ने विधानसभा से अपनी राय के साथ विधेयक लौटाने के लिए यही समय सीमा तय की है।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा हिस्सा अत्यंत हंगामेदार रहने की आशंका है, क्योंकि सीमांध्र के विधायक चाहते हैं कि विधानसभा में पहले राज्य को एकजुट रखने संबंधी प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के पास भेजा जाए। बंटवारा विरोधी मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी और सीमांध्र क्षेत्र से आने वाले उनके मंत्री भी विधेयक पर मतदान चाहते हैं, जबकि तेलंगाना क्षेत्र के विधायक इसका इस आधार पर विरोध कर रहे हैं कि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। विधानसभा में विधेयक के सामने उत्पन्न रुकावटें और संसद के सामने पारित करने के लिए सीमित समय को देखते हुए इस बात पर संदेह उत्पन्न हो गया है कि 29वें राज्य के रूप में तेलंगाना का गठन आम चुनाव से पहले हो पाएगा या नहीं।


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