सोनी का दावा, कांट्रैक्ट कर्मियों को स्थायी करेंगे

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Sunday, January 05, 2014-1:12 AM

नई दिल्ली (ताहिर सिद्दीकी): दिल्ली के श्रम एवं रोजगार मंत्री गिरीश सोनी के घर का नजारा उनके विधायक व मंत्री बनते ही बदल गया है। पहले लोग कभी-कभार उनके दरवाजे पर दस्तक देते थे, लेकिन अब भारी भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को सुबह 8 बजे मंत्री जी जनता की फरियाद सुनने बैठे तो शाम 3 बजे तक लोगों का तांता लगा रहा। सोनी भी हैरान हैं कि मंत्री बनते ही उनकी दुनिया बदल गई। पश्चिमपुरी में 40 गज के छोटे से जनता फ्लैट का उनका आशियाना अब छोटा पडऩे लगा है।

वह कहते हैं जन सुनवाई के लिए इलाके में बड़े दफ्तर की तलाश कर रहा हूं। सोनी एक साथ एक दर्जन से अधिक योजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने का मसला है। सोनी के घर पुलिस द्वारा प्रताडि़त करने, समय से पानी की आपूर्ति नहीं होने, अस्पताल में सुनवाई नहीं होने जैसी अंतहीन समस्याओं को लेकर लोग पहुंच रहे हैं। सोनी कहते हैं कि विधायक और मंत्री बनने के बाद आभास हो रहा है कि पुराना सिस्टम नाकाम हो चुका है और अब लोगों को बेहतर जीवन शैली देने के लिए स्वराज की परिकल्पना को लागू करना जरूरी हो गया है।

लम्बे समय से ठेके पर काम कर रहे कर्मचारी होंगे नियमित:
श्रम मंत्री ने बताया कि आप ने अपने घोषणा-पत्र में अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का वादा किया था। इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बातचीत भी कर ली है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में उन अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की योजना है जो दस साल या उससे पहले से काम कर रहे हैं।

सोनी ने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों से उनके यहां काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों का डाटा मांगा है। कुछ विभागों ने इससे संबंधित जानकारी भी मुहैया करा दी है। उन्होंने बताया कि अगले एक महीने में इस पर ठोस निर्णय ले लिया जाएगा।

इसमें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक,पैरामैडीकल स्टॉफ से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी शामिल हैं। अब आप की सरकार विभिन्न चरणों में उन्हें पक्का करने की कवायद शुरू करने वाली है। अस्थायी कर्मचारी लम्बे समय से इसकी मांग करते आ रहे हैं। सोनी ने इस मसले पर वित्त विभाग से भी बात कर ली है।

कंस्ट्रक्शन मजदूरों के लिए बनाएंगे हॉस्टल:
सोनी ने बताया कि पिछली सरकार ने कंस्ट्रक्शन मजदूरों के कल्याण के लिए एक फंड का निर्माण किया था, लेकिन हैरत की बात है कि पिछले 11 सालों में इस फंड से महज 37 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। मौजूदा समय में इस फंड में 1350 करोड़ रुपए हैं।

उन्होंने पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि बाकी बची भारी राशि से राजधानी के विभिन्न इलाके में कंस्ट्रक्शन मजदूरों के लिए हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा मजदूरों के लिए अन्य कल्याणकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की जाएगी।


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