आरोप झूठ का पुलिंदा : वीरभद्र

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Sunday, January 05, 2014-9:38 PM

शिमलाः हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भाजपा नेताओं अरुण जेटली तथा प्रेम कुमार धूमल द्वारा हाल ही में लगाए गए आरोपों को झूठ का पुलिंदा, मनगढंत एवं काल्पनिक बताया है। उन्होंने कहा है कि आरोप निरर्थक एवं राजनीति से प्रेरित हैं।

वीरभद्र सिंह ने एक बयान जारी कर कहा है कि अक्टूबर-नवंबर, 2012 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अरुण जेटली सहित भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने उनके खिलाफ आयकर मामले तथा इस्पात कंपनी को कथित रूप से लाभ पहुंचाने जैसे बेबुनियाद एवं आधारहीन आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा कि जेटली ने न केवल गैर कानूनी तरीके से उनकी आयकर रिटर्न की विस्तृत जानकारी प्राप्त की, जिसे आयकर दाता की अनुमति के बिना आर.टी.आई. के तहत भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्होंने अपनी पार्टी की सुविधा के लिए इसके कुछ अंश छुपा कर इसे शिमला में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में भी दिखाया।
 
वीरभद्र सिंह ने कहा है कि भाजपा के नेता साईं-कोठी परियोजना के संबंध में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि वैंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी लिमिटेड को साईं-कोठी परियोजना वर्ष 2002 में भाजपा शासनकाल के दौरान सौंपी गई थी। इस परियोजना को दिसंबर, 2002 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और रद्द करने की प्रक्रिया जनवरी, 2003 में भाजपा के ही कार्यकाल में आरंभ की गई थी।

उन्होंने कहा कि अप्रैल 2003 से 2004 के बीच कंपनी ने कांग्रेस सरकार के समय मामला बढ़ाया, लेकिन परियोजना को पुनर्बहाल करने का प्रस्ताव कांग्रेस सरकार द्वारा तीन बार अस्वीकार कर दिया गया। इससे प्रभावित होकर कंपनी वर्ष 2005 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में गई और 8 जून, 2005 तथा 19 जुलाई, 2005 को अदालत ने इस परियोजना को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को सौंप दिया। इसके बाद कंपनी सर्वोच्च न्यायालय गई। 5 सितंबर, 2005 तथा 15.9.2006 को शीर्ष अदालत ने परियोजना को कंपनी को आवंटित करने के लिए पुनर्विचार करने का आदेश दिया। उन्हीं आदेशों के आधार पर परियोजना को पुनर्विचार के उपरांत 7 जून, 2007 को मैसर्ज वैंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी लिमिटिड को सौंपा गया।

उन्होंने कहा कि साईं-कोठी परियोजना को भाजपा सरकार ने वर्ष 2009 से 2012 के बीच चार बार विस्तार दिया। अक्तूबर, 2012 में चौथा विस्तार भाजपा सरकार ने मार्च, 2013 तक दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने केवल एक बार कंपनी को विस्तार दिया है और वह भी 20 हजार रुपये प्रति मेगावाट प्रतिमाह के विस्तार शुल्क पर। यह शुल्क भाजपा सरकार द्वारा लिए गए 10 हजार रुपये प्रति मेगावाट प्रतिमाह शुल्क से दोगुना है। इसलिए यह कहना पूरी तरह बेबुनियाद व हास्यास्पद है कि उनकी सरकार ने इस कंपनी को कोई अनावश्यक लाभ पहुंचाया।
 
वकामुल्ला चंद्रशेखर से ऋण उठाने के सवाल पर वीरभद्र ने स्पष्ट किया है कि उनके पारिवारिक मित्र होने के कारण उन्होंने चेक के माध्यम से उनसे ब्याज पर व्यक्तिगत ऋण लिया। उन्होंने कहा कि यह एक कानूनी लेन-देन है, जो वैध है और उनके द्वारा किश्तों में चैक के माध्यम से ऋण व ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी को भी ऐसे लेन-देन पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने या कांग्रेस सरकार ने कभी भी चंद्रशेखर को लाभ नहीं पहुंचाया।

उन्होंने कहा है कि जुलाई, 2011 से नवंबर, 2011 के बीच उन्होंने 2.40 करोड़ रुपये और प्रतिभा सिंह ने डेढ़ करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसमें से उन्होंने चेक के माध्यम से अपने सुपुत्र विक्रमादित्य सिंह को 1.20 करोड़ रुपये दिए। इस अवधि के दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। अत: किसी को लाभ पहुंचाने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि प्रेम कुमार धूमल तथा अरुण जेटली अपने संवाददाता सम्मेलनों में जानबूझ कर तथ्यों को अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए छुपा रहे हैं।


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