कुर्सी ने उतार दी आप की टोपी

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Monday, January 06, 2014-3:18 PM

नई दिल्ली (निहाल सिंह) : विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद आम आदमी पार्टी (आप)  के नेताओं पर कुर्सी का नशा सिर चढ़कर बोलने लगा है। चुनाव से पहले जो टोपी आप के नेताओं की पहचान बनी हुई थी, वह अब नेताओं के सिर से गायब हो गई है।  नेता तो नेता आप बनाने वाले दिल्ली के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी टोपी से किनारा कर लिया है। मंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद अब मनीष सिसोदिया सहित बाकि दूसरे मंत्री और आप के बड़े नेता गली मोहल्लों, सड़को, पार्को और कार्यक्रमों में बिना टोपी पहने दिखाई दे रहे हैं।

इसी टोपी को आप और आम आदमी की पहचान बताकर चुनाव से पहले आप के नेताओं ने लोगों से वोट मांगे थे।  दिल्ली में ताजपोशी होने के बाद आप टोपी भूल गयी है। विश्वासमत पाने के बाद से टोपी न पहनने का शुरु हुआ सिलसिला लगातार जारी हैं। एक ओर जहां दिल्ली के मुखिया अरविंद केजरीवाल ज्यादातर जगह पर बिना टोपी के नजर आते हैं, वहीं आप के विधायक भी इसमें पीछे नहीं है।

आप के मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक के बाद आप के बड़े नेता संजय सिंह, योगेन्द्र यादव, शांति भूषण, गोपाल राय भी अब बिना टोपी के नजर आते हैं। चौकाने वाली बात यह है कि दो दिवसीय चल रही आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में भी कई राज्यों के संयोजक और राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य भी बिना टोपी के नजर आए थे।

क्या खास बन रहा है आम आदमी : क्या खास बन रहा है आम आदमी ? यह सवाल इसलिए उठने लगे हैं क्योंकि जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ था तो आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल यह कहां करते थे कि यह टोपी जब तक हमारे सिर पर रहेगी, यह आम आदमी होने का एहसास कराती रहेगी। और यह टोपी हमे घमंड से बचायेगी।

अब दिल्ली में जब सरकार बन गयी है तो क्या आम आदमी पार्टी खास बन गया है? क्या आम आदमी पार्टी आम आदमी होने का एहसास भूल गयी है? क्या आप के नेता घमंडी हो गए है। पार्टी नेताओं के सिर से गायब हुई टोपी के बाद यह सवाल अब उठने लगे हैं। बता दें कि हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आवास के लिए डुपलैक्स घर लेने  की तैयारी के बाद भी आम आदमी पार्टी पर खास होने का आरोप लगा था। लेकिन मीडिया और जनता में हो रही आलोचनाओं के बाद आप नेता ने डुपलैक्स लेने से मना कर दिया था। 


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