मुजफ्फरनगर दंगा: RSS कर रही प्रचार, बदला लेने का सही तरीका यही था

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Monday, January 06, 2014-4:17 PM

मुजफ्फनरनगर: जिला प्रशासन ने मुस्लिम नेताओं के खिलाफ कथित रूप से उकसाऊ भाषण द्वारा दंगे भड़काने से जुड़ा मामला वापस लेने के संबंध में रिपोर्ट अब तक नहीं सौंपी है। मुजफ्फरनगर दंगों को खत्म हुए 4 माह हो चुके हैं लेकिन राजनीतिक गलियारे में इस पर चर्चा फिलहाल जारी है। अभी कुछ दिन पूर्व ही दंगा राहत शिविरों की बदतर हालत और व्यवस्था के कारण भी यूपी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

 

दूसरी तरफ राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अखिलेश सरकार को निशाना बनाते हुए 24 पन्‍नों की एक पत्रिका जारी की है और इस पत्रिका को  'मुजफ्फरनगर दंगा' नाम दिया गया है।  इस पत्रिका में संघ ने उन दो जाट युवकों का पक्ष लिया है, जिनके कारण कथित तौर पर दंगा भड़का था। पत्रिका ने अपने संपादकीय में लिखा है, 'कोई भी भाई अपनी बहन के साथ अपमान को कैसे बर्दाश्‍त कर सकता है?' इस संपादकीय के साथ ही दोनों युवकों की तस्‍वीर भी छापी गई है।

 

हालांकि संपादकीय लिखने वाले का नाम या हस्‍ताक्षर प्रकाशित नहीं किया गया है। गौरतलब है कि ये दो युवक सचिन और गौरव वही  हैं, जिन्‍होंने बहन से छेड़छाड़ करने पर एक मुस्लिम युवक की हत्‍या कर दी थी और बाद में इन दोनों युवकों की भी हत्‍या कर दी गई थी। सपा सरकार पर हमला करते हुए पत्रिका में लिखा गया है, 'सपा सरकार को संभवत: यह डर है कि यदि मुस्लिम नाराज हो गए तो वह सत्ता खो देगी. इसलिए अखिलेश सरकार ने मुस्लिम दंगा पीड़ितों को पांच लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की गई।

 

एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस ने जब पत्रिका में संपादक या किसी अन्‍य का नाम न होने पर प्रकाशित पता 'विश्‍व संवाद केंद्र, 105, आर्य नगर, सूरज कुंड रोड, मेरठ' पर संपर्क किया तो संघ के प्रचारक ने कहा कि यह पत्रिका मेरठ प्रांत के संघ कार्यकर्त्ताओं द्वारा निकाली गई है और इसका एकमात्र उद्देश्‍य समाज को जागरुक करना और दंगों के बारे में लोगों तक सच्‍चाई को पहुंचाना है। संघ के प्रचारक शिवप्रकाश ने कहा कि जब समुदाय विशेष के प्रति प्रदेश सरकार का एकतरफा नजरिया लोगों को उत्‍तेजित नहीं कर सका तो उन्‍हें नहीं लगता कि पत्रिका में छपी सामग्री से लोग भड़केंगे।

 

बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री सु‍धीर कुमार बलियान व एक हिंदू दंगा पीडि़त के वकील जगबीर सिंह ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्‍य भावनाओं को भड़काना नहीं बल्कि लोगों को सच्‍चाई बताना है। जगबीर ने बताया कि बीजेपी, आरएलडी और कांग्रेस नेताओं ने उन्‍हें पत्रिका के प्रकाशन के लिए आर्थिक मदद दी।


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