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2 मेयरों को अभी तक नहीं मिला है आवास

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Tuesday, January 07, 2014-1:30 PM

नई दिल्ली (सज्जन चौधरी): दिल्ली के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री के लिए सरकारी बंगले की तलाश जोर-शोर से हो रही है लेकिन दिल्ली के 3 में से 2 मेयर के पास सरकारी आवास नहीं है। निवास तो दूर की बात मेयर हाऊस के लिए निगम के पास अभी तक जमीन भी नहीं है। दिल्ली नगर निगम के 3 हिस्से होने के बाद तीनों मेयर को एक-एक सरकारी निवास मिलना था लेकिन 3 साल बीतने के बाद भी 3 में से 2 मेयर को आज तक निवास नहीं मिला है।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर राम नारायण दूबे विवेक विहार स्थित अपने निवास से ही काम चला रहे हैं। दूबे जी अपने घर में ही दफ्तर खोल कर जनता दरबार लगा रहे हैं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम में मेयर हाऊस के लिए निगम के पहले आयुक्त सज्जन सिंह यादव ने प्रस्ताव लगाया था, जिसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकण (डी.डी.ए.) से जमीन मांगी गई थी। डी.डी.ए. ने जमीन के लिए कड़कडड़ूमा स्थित सी.बी.डी. ग्राऊंड का सुझाव दिया था लेकिन तत्कालीन मेयर डॉ. अन्नापूर्णा मिश्रा ने सुझाई गई जगह पर रहने से मना कर दिया। उसके बाद मेयर निवास का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

कुछ यही हाल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम महापौर सरिता चौधरी का भी है। वे भी अपने निजी आवास से जनता के लिए कार्य कर रही हैं। उनके लिए भी डी.डी.ए. से जमीन मांगी गई थी, लेकिन अभी तक डी.डी.ए. की ओर से जमीन नहीं दी गई, ऐसे में महापौर साहिबा को अपने निजी मकान से काम चलाना पड़ रहा है। तीनों निगमों में सिर्फ उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर मास्टर आजाद सिंह के पास सरकारी निवास है। एकीकृत निगम के समय मेयर के लिए तिमारपुर स्थित आलीशान बंगला बनाया गया था।

निगम के बंटवारे के बाद यह बंगला उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आ गया, जिसके चलते यहां के महापौर के पास सरकारी निवास है। मामले में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर राम नारायण दूबे का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मेयर हाऊस का मुद्दा नहीं उठाया, वह नहीं चाहते कि वे जनता के पैसे से कोई भी सुख सुविधा लें। उल्टे उन्होंने अपने निवास स्थान पर ही जनता के लिए दरबार लगाना शुरू कर दिया है।

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