देश भर में कई एनजीओ के मालिक हैं केजरीवाल व मनीष सिसोदिया!

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Tuesday, January 07, 2014-2:50 PM

लखनऊ: अरविंद केजरीवाल लंबे अरसे तक राजस्व विभाग से छुटटी लेकर भी सरकारी तनख्वाह ले रहे थे और एनजीओ से भी वेतन उठा रहे थे, जो श्रीमान ईमानदार को कानूनन भ्रष्टाचारी की श्रेणी में रखता है। वर्ष 2006 में परिवर्तन में काम करने के दौरान ही उन्हें अमेरिकी फोर्ड फाउंडेशन व रॉकफेलर ब्रदर्स फंड ने उभरते नेतृत्व के लिए रेमॉन मेग्सेसाय पुरस्कार दिया, जबकि उस वक्त तक अरविंद ने ऐसा कोई काम नहीं किया था, जिसे उभरते हुए नेतृत्व का प्रतीक माना जा सके। इसके बाद अरविंद अपने पुराने सहयोगी मनीष सिसोदिया के एनजीओ कबीर से जुड़ गए, जिसका गठन इन दोनों ने मिलकर वर्ष 2005 में किया था।

केजरीवाल को समझने से पहले रेमॉन मेग्सेसाय को समझ लीजिए: अमेरिकी नीतियों को पूरी दुनिया में लागू कराने के लिए अमेरिकी खुफिया ब्यूरो सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) अमेरिका की मशहूर कार निर्माता कंपनी फोर्ड द्वारा संचालित फोर्ड फाउंडेशन एवं कई अन्य फंडिंग एजेंसी के साथ मिलकर काम करती रही है। 1953 में फिलिपिंस की पूरी राजनीति व चुनाव को सीआईए ने अपने कब्जे में ले लिया था। भारतीय अरविंद केजरीवाल की ही तरह सीआईए ने उस वक्त फिलिपिंस में रेेमॉन मेग्सेसाय को खड़ा किया था और उन्हें फिलिपिंस का राष्ट्रपति बनवा दिया था। अरविंद केजरीवाल की ही तरह रेेमॉन मेग्सेसाय का भी पूर्व का कोई राजनैतिक इतिहास नहीं था। रेेमॉन मेग्सेसाय के जरिए फिलिपिंस की राजनीति को पूरी तरह से अपने कब्जे में करने के लिए अमेरिका ने उस जमाने में प्रचार के जरिए उनका राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय छवि निर्माण से लेकर उन्हें ष्नॉसियोनालिस्टा पार्टीष् का  उम्मीदवार बनाने और चुनाव जिताने के लिए करीब 5 मिलियन डॉलर खर्च किया था।

तत्कालीन सीआईए प्रमुख एलन डॉउल्स की निगरानी में इस पूरी योजना को उस समय के सीआईए अधिकारी एडवर्ड लैंडस्ले ने अंजाम दिया था। इसकी पुष्टि 1972 में एडवर्ड लैंडस्ले द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार में हुई। ठीक अरविंद केजरीवाल की ही तरह रेमॉन मेग्सेसाय की ईमानदार छवि को गढ़ा गया और डर्टी ट्रिक्स के जरिए विरोधी नेता और फिलिपिंस के तत्कालीन राष्ट्रपति क्वायरिनो की छवि धूमिल की गई। यह प्रचारित किया गया कि क्वायरिनो भाषण देने से पहले अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ड्रग का उपयोग करते हैं। रेमॉन मेग्सेसाय की गढ़ी गई ईमानदार छवि और क्वायरिनो की कुप्रचारित पतित छवि ने रेमॉन मेग्सेसाय को दो तिहाई बहुमत से जीत दिला दी और अमेरिका अपने मकसद में कामयाब रहा था। भारत में इस समय अरविंद केजरीवाल बनाम अन्य राजनीतिज्ञों की बीच अंतर दर्शाने के लिए छवि गढऩे का जो प्रचारित खेल चल रहा है वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए द्वारा अपनाए गए तरीके और प्रचार से बहुत कुछ मेल खाता है।

उन्हीं रेमॉन मेग्सेसाय के नाम पर एशिया में अमेरिकी नीतियों के पक्ष में माहौल बनाने वालों, वॉलेंटियर तैयार करने वालों, अपने देश की नीतियों को अमेरिकी हित में प्रभावित करने वालों, भ्रष्टाचार के नाम पर देश की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने वालों को फोर्ड फाउंडेशन व राकफेलर ब्रदर्स फंड मिलकर अप्रैल 1957 से रेमॉन मेग्सेसाय अवार्ड प्रदान कर रही है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके साथी व आम आदमी पार्टी के विधायक मनीष सिसोदिया को भी वही रेमॉन मेग्सेसाय पुरस्कार मिला है और सीआईए के लिए फंडिंग करने वाली उसी फोर्ड फाउंडेशन के फंड से उनका एनजीओ कबीर और इंडिया अगेंस्ट करप्शन मूवमेंट खड़ा हुआ है। भारत में राजनैतिक अस्थिरता के लिए एनजीओ और मीडिया में विदेशी फंडिंग : फोर्ड फाउंडेशन के एक अधिकारी स्टीवन सॉलनिक के मुताबिक कबीर को फोर्ड फाउंडेशन की ओर से वर्ष 2005 में 1 लाख 72 हजार डॉलर एवं वर्ष 2008 में 1 लाख 97 हजार अमेरिकी डॉलर का फंड दिया गया।

यही नहीं, कबीर को डच दूतावास से भी मोटी रकम फंड के रूप में मिली। अमेरिका के साथ मिलकर नीदरलैंड भी अपने दूतावासों के जरिए दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अमेरिकी-यूरोपीय हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए वहां की गैर सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ को जबरदस्त फंडिंग करती है। अंग्रेजी अखबार पॉयनियर में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक डच यानी नीदरलैंड दूतावास अपनी ही एक एनजीओ हिवोस के जरिए नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार को अस्थिर करने में लगे विभिन्न भारतीय एनजीओ को अप्रैल 2008 से 2012 के बीच लगभग 13 लाख यूरो, मतलब करीब सवा नौ करोड़ रुपए की फंडिंग कर चुकी है।  इसमें एक अरविंद केजरीवाल का एनजीओ भी शामिल है। हिवोस को फोर्ड फाउंडेशन भी फंडिंग करती है। डच एनजीओ हिवोस दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में केवल उन्हीं एनजीओ को फंडिंग करती है।




 


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