युवाओं में इंटरनेट की नई संस्कृति एक बडी क्रांति: मनीष तिवारी

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Tuesday, January 07, 2014-3:38 PM

नई दिल्ली: सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने युवाओं के बीच इंटरनेट की नई संस्कृति उभरने को समकालीन जगत की सबसे बडी क्रांति करार देते हुए आज कहा कि इस तकनीक का दुनिया भर में रहने वाले भारतवंशी युवाओं के बीच सतत संपर्क के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। तिवारी ने यहां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के पहले दिन युवा प्रवासी दिवस के मौके पर आयोजित भारतवंशी युवाओं की आकांक्षाएं विषय पर एक परिचर्चा में कहा कि प्रवासी समुदाय को उनके पूर्वजों के देश से जोडने में युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने कहा कि दूरियां, सीमाएं, आव्रजन बाधाएं, वीजा आदि बाधक तत्वों को तकनीक ने बहुत पीछे छोड दिया है। उन्होंने कहा कि वह समकालीन जगत में इंटरनेट की ईजाद सबसे बडी क्रांति मानते हैं जिसने संपर्क की भौतिक बाधाओं को लगभग मिटा दिया है। मानव अपने पूरे इतिहास में इतना ताकतवर कभी नहीं रहा जितना इंटरनेट युग में हो गया है। हर दिन, हर क्षण नए आंकडे इंटरनेट को और ताकतवर करते जा रहे हैं और इस पर युवाओं का वर्चस्व है जिनके बीच एक नई  ‘वर्चुअल संस्कृति’ तेजी से उभर रही है।

तिवारी ने कहा कि युवाओं में इंटरनेट के प्रति अगाध उत्साह है। इंटरनेट पर मौजूद युवा पीढी की आकांक्षाएं लगभग एक जैसी हैं। वे एक दूसरे से संपर्क करने, सीखने और सूचनाएं साझा करने को तत्पर हैं। लेकिन यह प्रक्रिया अनियोजित और अनौपचारिक है। उन्होंने कहा कि इस अनौपचारिक एवं अनियोजित संपर्क को नियोजित करने तथा विदेशों में रह रहे भारतवंशी युवाओं एवं भारतीय युवाओं के बीच उत्पादक, रचनात्मक और सार्थक संवाद का माध्यम बनाने का प्रयास करने की जरूरत है। परिचर्चा में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डा. चारू वली खन्ना, नीदरलैंड्स से आईं कीॢत वेदिका माताबादल और अमेरिका में हयूस्टन विश्वविद्यालय की प्रेसीडेन्ट एवं चांसलर डा. रेणु खट्टर ने भाग लिया।


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