मानवीय एकता के प्रतीक श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी

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Tuesday, January 07, 2014-7:44 PM

दुनिया के महान तपस्वी, महान कवि, महान योद्धा, संत सिपाही साहिब गुरु गोबिंद सिंह जी जिनको बहुत ही श्रद्धा व प्यार से कलगीयां, सरबंस दानी, नीले वाला, बाला प्रीतम, दशमेश पिता आदि नामों से पुकारा जाता है। उन्होंने दिसंबर 1666 ई. को पटना साहिब में सिख धर्म के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के घर जन्म लिया। उनकी माता जी का नाम गुजरी जी था।

'मानस दी जाति सभे एक पहिचानबे' गुरू गोबिंद सिंह जी के मुख से निकला हुआ यह संदेश आज एक मुहावरा बन गया है। आपने सभी धर्मों को एक समान सम्मान देने के हक में थे। गुरू नानक देव जी के उपदेश हिंदू एक अच्छा हिंदू और मुसलमान को एक अच्छा मुस्लमान बनना चाहिए। इस उपदेश के आप ग्रहणशील थे। एक बार बादशाह बहादुर शाह ने आप से पूछा था, मजहब तुम्हारा खूब है या हमारा ? इस पर गुरू जी का उत्तर था, तुमको तुम्हारा खूब, हम को हमारा खूब। गुरू जी का यह ऐतिहासिक उत्तर आज भी धार्मिक सहनशीलता को अपना कर मानवीय एकता के लिए प्रेरित करता है।

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