हाईकोर्ट ने शिक्षक को राहत देने से किया इंकार, कहा भेजो जेल

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Tuesday, January 07, 2014-7:52 PM

नई दिल्ली : एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को गणित की पूरक परीक्षा में पास करने के लिए तीन हजार रुपए रिश्वत मांगना महंगा पडा। निचली अदालत द्वारा सजा देने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने शिक्षक को राहत देने से इंकार कर दिया है।

न्यायालय ने शिक्षक को कहा है कि वह अपनी सजा काटने के लिए तैयार रहे। न्यायमूर्ति वी.के.जैन की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने पद का दुरुपयोग किया है। शिक्षक सरकारी कर्मी होते हुए रिश्वत की मांग की है।

इस मामले में शिक्षक महेश पाल सिंह ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। निचली अदालत ने महेश को तीन साल कैद व तीस हजार रुपए जुर्माना की सजा दी। महेश राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय में अंग्रेजी विषय का शिक्षक है।

महेश ने अपनी याचिका में कहा था कि वह तो अंग्रेजी का शिक्षक है। ऐसे में किसी को गणित में पास कराने के लिए वह कैसे पैसे ले सकता है। अदालत ने कहा है कि हमारे देश में लोग वैसे ही रिश्वत के मामले में शिकायत करने नहीं आते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के पास शिकायत कराने की हिम्मत करता है तो बड़ी बात है।

24 अप्रैल 2007 को शिकायतकर्ता शिवकुमार ने अपनी शिकायत में बताया था कि उसका बेटा आठवीं कक्षा का छात्र था। वह गणित विषय में फेल हो गया था। जिसके बाद शिक्षक महेश ने उसके बेटे के जरिए उसके पास मैसेज भेजा और उसे स्कूल में बुलाया।

जब वह शिक्षक से मिलने स्कूल गया तो उसने गणित की पूरक परीक्षा में पास करने के लिए तीन हजार रुपए मांगे। उसने रिश्वत न देकर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को शिकायत कर दी। शिवकुमार की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने जाल बिछाया और महेश को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा।


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