मोदी पर लगे आरोपों को दफन करने का भाजपा का प्रयास

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Tuesday, January 07, 2014-9:16 PM

नई दिल्ली: भाजपा ने आज कहा कि गुजरात में कथित रूप से दंगे भड़काने के लिए साबरमती एक्सप्रेस में आग लगवाने, 2002 दंगों को लेकर ‘क्रिया-प्रतिक्रिया’ का कथित बयान देने और हिन्दुओं को गुस्सा उतारने देने का कथित आदेश देने जैसे नरेन्द्र मोदी पर लगाए गए सभी ‘झूठे’ आरोपों का पर्दाफाश हो चुका है और अदालत ने उन्हें निर्दोष करार दिया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने अपने फेसबुक की नयी पोस्ट में कहा कि गोधरा दंगों के बाद मोदी के खिलाफ सतत रूप से चलाया गया ‘साजिशी प्रचार’ ‘‘ढह गया है क्योंकि वह झूठ पर आधारित था।’’ उन्होंने न्यायमूर्ति यू सी बनर्जी आयोग की उस रिपोर्ट को बकवास बता कर खारिज कर दिया जिसमें कहा गया है कि साबरमती एक्सप्रेस की बोगी एस-6 में भीड़ ने आग नहीं लगाई और वह आग किसी कारण से अंदर से ही शुरू हो सकती लगती है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले दिन से साफ था कि एक समुदाय की एक गुमराह भीड़ ने गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के बोगी नंबर एस 6 में आग लगाई। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने भी घटना की जांच करके पाया कि बोगी में आग लगाने के लिए एक दिन पहले ही वाहनों में भर कर इ’धन स्टेशन लाया गया था। भाजपा नेता ने कहा कि यह मिथ्या प्रचार यह स्थापित करने के लिए किया गया था कि गुजरात में दंगा भड़काने के लिए हिन्दू समुदाय ने रेलगाड़ी के डिब्बे में आग लगाई।

जेटली ने कहा कि एक इंटरव्यू में मोदी के हवाले से कहा गया था कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है और इसलिए गोधरा बाद की हिंसा प्रतिक्रिया के रूप में न्यायोचित थी। जेटली ने कहा कि नरेन्द्र मोदी कह चुके हैं कि उन्होंने ऐसा कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस व्यक्त किया कि अखबार ने 20 दिन बाद स्पष्टीकरण छापा कि उसने मोदी से कोई इंटरव्यू नहीं किया है और इसे भी प्रमुखता से नहीं छापा।

जेटली ने आईपीएस अधिकारी संजीव भटट के इन दावों का भी खंडन किया  कि मोदी के आवास पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठतम अधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कथित रूप से कहा था कि हिन्दुओं को गुस्सा निकालने की अनुमति होनी चाहिए। जेटली के मुताबिक विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने कहा कि बैठक में संजीव भटट मौजूद नहीं थे और मुख्यमंत्री ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी। मजिस्ट्रेट की अदालत ने एसआईटी के नजरिये का समर्थन किया है।


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