आपराधिक मामले में आरोपी के बरी होने पर दंडित होंगे अधिकारी: हाईकोर्ट

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Tuesday, January 07, 2014-9:44 PM

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि आपराधिक मामले में आरोपी के बरी होने को न्याय प्रदान करने वाली व्यवस्था की विफलता समझा जाना चाहिए।  न्यायालय ने ऐसे मामलों में सरकार को जांच अधिकारियों को दंडित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति सी के प्रसाद और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने त्रुटिपूर्ण जांच के कारण आरोपियों के बरी होने की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की और सभी राज्य सरकारों को अपने अधिकारियों को समुचित तरीके से प्रशिक्षित करने के लिए छह महीने के भीतर एक व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपराधिक मामलों में आरोपियों को दंडित किया जा सके और इनमें निर्दोष व्यक्तियों को फंसाया नहीं जाए।

न्यायाधीशों ने कहा कि आरोपी को बरी करने के प्रत्येक मामले को न्याय प्रदान करने की व्यवस्था की विफलता समझा जाना चाहिए और इसी तरह इससे सामान्यतया यह निष्कर्ष भी निकलना चाहिए कि निर्दोष व्यक्ति पर गलत तरीके से मुकदमा चलाया गया।

न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक राज्य ऐसी व्यवस्था करें जिससे न्याय का उद्देश्य पूरा हो सके और साथ ही निर्दोष व्यक्तियों के हितों की रक्षा की जा सके। न्यायालय ने प्रत्येक राज्य के गृह विभाग को आपराधिक मामलों में आरोपियों के बरी करने संबंधी सभी आदेशों की विवेचना करने और जांच एवं अभियोजन की खामियों का पता लगाते हुए अदालत में अभियोजन का मामला विफल होने के कारणों को दर्ज करने का आदेश दिया।
 


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