आरोप निराधार पर परिवार की शांति के लिए दिया इस्तीफा: गांगुली

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Wednesday, January 08, 2014-8:37 AM

कोलकाता: न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली ने पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के पद से इस्तीफा देने के कदम का बचाव करते हुए कहा कि ला इंटर्न के यौन शोषण का आरोप निराधार है लेकिन फिर भी उन्होंने परिवार की शांति के लिए इस्तीफा दे दिया। मीडिया में शोमवार को दिन भर न्यायमूर्ति गांगुली के इस्तीफे को लेकर असमंजस की स्थिति रही लेकिन उच्चस्तरीय सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति गांगुली ने वास्तव में इस्तीफा दे दिया है और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन ने उनकी इस्तीफा मंजूर कर लिया है।

 

सूत्र के मुताबिक न्यायमूर्ति गांगुली ने अपने त्यागपत्र में लिखा है, ‘मैं इस बात को कहना चाहूंगा कि इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया दोनों में मेरे खिलाफ जो आरोप लग रहे हैं वे पूरी तरह निराधार हैं और मैं इससे इनकार करता हूं। मेरा किसी पद के साथ तब तक कोई लगाव नहीं है जब तक मैं सम्मान के साथ काम न कर सकूं। और मौजूदा स्थिति में ऐसा संभव नहीं है।’ उन्होंने लिखा है कि विवादों को और हवा देने से राकने और अपने परिवार की शांति और खुशी के लिए वह इस्तीफा दे रहे हैं।

 

इससे पहले उन्होंने गत सप्ताह नेशनल यूनिवर्सिटी आफ ज्यूडिशियल साइंसेज में गेस्ट फैकल्टी पद से भी इस्तीफा दे दिया था। गत गुरुवार को न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़ऩ के आरोप की पृष्ठभूमि में उन्हें पद से हटाने के संबंध में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संविधान की धारा 143 के तहत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद उन पर काफी दबाव बढ गया था।

 

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम ने संज्ञान लेकर न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ लगे आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया जिसने प्रथम दृष्टयतया उन्हें दोषी पाया है। न्यायमूर्ति गांगुली ने आरोप से सिरे से इनकार किया है।


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