इशरत मामला: सीबीआई पूरक आरोपपत्र में मकसद नहीं बताये जाने की संभावना

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Wednesday, January 08, 2014-9:44 AM

नई दिल्ली: इशरत जहां मुठभेड़ मामले में सीबीआई के प्रस्तावित पूरक आरोपपत्र में वह सही मकसद नहीं बताए की संभावना है जिसके चलते कथित तौर पर खुफिया ब्यूरो के अधिकारी कथित साजिश का हिस्सा बने थे। सूत्रों ने बताया कि आरोपपत्र को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें खुफिया ब्यूरो के चार अधिकारियों की भूमिका हो सकती है। लेकिन एजेंसी अभी तक उस मकसद के बारे में अंतिम फैसला नहीं कर पायी है जिसके चलते यह मुठभेड़ हुई।

 

एजेंसी को इस मुठभेड़ के लिए राजनीतिक मंजूरी मिलने का भी कोई साक्ष्य नहीं मिला है। 2004 में हुई इस मुठभेड़ में 19 वर्षीय इशरत, जावेद पिल्लै, अमजद अली राणा और जीशान जौहर मारे गए थे। इस मुठभेड़ को कथित रूप से गुजरात अपराध शाखा के कर्मियों ने अंजाम दिया था। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई आईबी अधिकारियों की भूमिका के बारे में ध्यान केन्द्रित करेगी जो कथित रूप से साजिश का हिस्सा थे। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एजेंसी उनके खिलाफ कब आगे कार्रवाई करेगी।

 

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने कानून मंत्रालय की राय मांगी है कि क्या साजिश में कथित रूप से संलिप्त आईबी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन में मंजूरी की जरूरत पड़ेगी। सूत्रों ने बताया कि मुठभेड़ के पीछे की साजिश में आईबी अधिकारियों की भूमिका के बारे में उन्होंने पर्याप्त सबूत एकत्र कर लिए हैं। लेकिन उनकी जांच में उस मकसद का खुलासा नहीं हुआ जिससे कथित अपराध में उनकी संलिप्तता हुई।


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