अकेले रहने वाले बुजुर्गों को सहारा देने की कोशिश करती है दिल्ली पुलिस

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Wednesday, January 08, 2014-3:15 PM

नई दिल्ली (महेश चौहान): दिल्ली में बुुजुर्गों की सुरक्षा दिल्ली पुलिस के लिए  कुछ अह्म मुद्दों में से एक है। क्योंकि बदमाश इनको सबसे आसान टारगेट  मानते है। पिछले पांच सालों में ऐसे कई बड़े मामले सामने आए थे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस पर भी सवाल खड़े हुए थे।
3 साल पहले दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त युद्धवीर सिंह डडवाल ने बुजुर्गो की सुरक्षा को अपने कामों में पहले स्थान पर रखा था।

उन्होंने इसके लिए सबसे पहले बीट अफसरों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने इलाकों में रहने वाले उन बुजुर्गाे की लिस्ट बनवाएं, जो घरों में अकेले रहते थे। जिसके घरवाले देश से बाहर रहते थे या फिर जिनके बेटे आदि सुबह नौकरी करने जाते थे और शाम को घर लौटते थे। इसके अलावा उन्होंने उनकी भी लिस्ट बनवाई, जिनके साथ कोई नौकर रहता था। उन्होंने बुजुर्गो की लिस्ट के साथ नौकरों की भी लिस्ट बनवाई थी।

2012 में दिल्ली पुलिस ने 17338 बुजुर्गो का सिक्योरिटी ऑडिट किया था। 2012-13 में उनकी सुरक्षा के लिहाज से 15747 आई कार्ड बनाए। पिछले साल दिल्ली पुलिस ने 387044 बुजुर्गो से संपर्क किया और 267043 से फोन से संपर्क किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर बीट अफसर ही नहीं, थानाध्यक्ष को भी निर्देश दिए हुए है कि वह अपने इलाके के बुजुर्गो से हर राज मिला करें।

इसके लिए जिनके आईकार्ड बने हुए है। उनके पास एक रजिस्टर भी रखवा रखा है। जिसमें हर रोज पुलिस वाले आकर अपने हस्ताक्षर करके अपनी अनुपस्थिति दर्ज करवाते है। पुलिस वाले उनका खाना खाने से लेकर बीमारी मे पूरा ध्यान रखे है। उनको अगर किसी से भी शिकायत होती है तो वह उसका अगले ही पल निर्वाण भी करते है।

यही नहीं,  बुजुर्गों को उनके एरिया पुलिस स्टेशन एसीपी और उपायुक्त के मोबाइल फोन नंबर भी दे रखे है। अगर कोई पुलिस वाला उनके पास नहीं आता है तो वे उसकी शिकायत कर सकते है। अधिकारियों ने उन आरोपों को खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि पुलिस वाले बुजुर्गों के पास जाना एक मुसीबत समझते हैं। क्योंकि उनके पास जाकर उनको कुछ मिलता नही है। सिर्फ उनकी बेमतलब की बातें सुुननी पड़ती है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि काफी बार ऐसा सामने आया भी है।

जिस के बाद पुलिस वाले पर सख्त कार्रवाई की गई। लेकिन पुलिस वाले निस्वार्थ तरीके से एक परिवार की तरह से उनसे मिल रहे हंै। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अकेले रह रहे बुजुर्ग एक बच्चे की तरह से होते है। जिनकी जिद भी सुननी पड़ती है। उनकी एक बच्चे की तरह देखभाल करनी पड़ती है। ऐसे बुजुर्गों का जब उनके सगे साथ छोड़कर चले जाते है। तब दिल्ली पुलिस उनका परिवार बनती है और आखिरी तक सेवा करती है। 


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