प्रशिक्षु के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं: गांगुली

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Thursday, January 09, 2014-12:04 AM

कोलकाताः न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए. के. गांगुली ने बुधवार को कहा कि वे यौन प्रताडऩा का आरोप लगाने वाली विधि प्रशिक्षु के खिलाफ मानहानि का मामला दायर नहीं करेंगे, क्योंकि वह उनकी छात्रा थी।

गांगुली ने यहां संवाददाताओं से कहा, मैं ऐसा कतई नहीं करूंगा क्योंकि वह मेरी छात्रा थी। मैं कभी ऐसा नहीं करूंगा। इसकी बजाय मैं जेल जाना चाहूंगा, यह मामला दो राजनीतिक विरोधियों के बीच का नहीं है। पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के दो दिनों बाद गांगुली ने कहा, लेकिन यदि उसने मेरे खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया तो मैं अपना बचाव करूंगा।

उन्होंने उल्लेख किया कि आरोप अकारण हैं और वे खुद को बेहद टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इस आरोप से मैं अत्यंत टूटा हुआ महसूस कर रहा हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक प्रशिक्षु इस तरह का आरोप लगा सकती है। मैं नाखुश हूं। यदि आरोप लगे हैं तो मैं कहना चाहूंगा कि इसका कोई कारण नहीं था।

एक होटल में पीड़िता को दिसंबर 2012 में जबरन शराब पीने के लिए बाध्य करने के आरोप के बारे में पूछे जाने पर गांगुली ने बदले में सवाल दागा, क्या आप उस आदमी को शराब पीने के लिए बाध्य कर सकते हैं जो नहीं पीता है? यदि वह शराब नहीं पीती थी तो उसे इनकार करना चाहिए था। गांगुली ने कहा कि यदि खुद को असहज महसूस कर रही थी तो उसे कमरे से उठकर चला जाना चाहिए था, लेकिन उसने उनके साथ खाना खाया। उन्होंने कहा, ‘‘और इस घटना के 11 महीनों बाद उसने आरोप लगाए।’’


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