यूपी: विरासत में मिली विकलांगता का दंश झेल रहा पूरा परिवार

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Thursday, January 09, 2014-11:00 AM

सुलतानपुर: इसे ईश्वर का दण्ड ही कहा जा सकता है कि पूरा परिवार एक ही तरह के विकलांगता का शिकार है। कहावत है कि अनुवांशिकता सभी पर नहीं लागू होती किन्तु वैज्ञानिक तथ्य देखें तो एक परिवार पर पूरी तरह से अनुवांशिकता का असर है जिसका परिणाम है कि सुलतानपुर जिले के कसम गांव के परिवार में 12 लोग बोल नहीं सकते हैं। ये सभी मूक बधिर हैं। उनकी लाचारी और बेबसी उनकी आंखों में साफ झलकती है। मुफलिसी के दौर से गुजर रहे इस कु नबे के बेजुबानों की इशारों के संग ही बीत रही है। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के कसम गांव में रह रहे इस परिवार की अपनी अलग दुनिया है। सूरज की पहली किरण के साथ शुरु होती है इनकी अपनों से इशारों इशारों में बात करने तथा वस्तुओं के आदान प्रदान करने का सिलसिला जो देर रात खत्म होता है। कुनबे की मुखिया शहल निशा खुद तो गूंगी हैं।

परिवार के भी 12 लोग इन्हीं की तरह हैं जिसमें बेटा अयूब (60) मो. जमा (58) पुत्री आमिना (56) बहू अजमतुन निशां(55) पोती साबरीन (17) आफरीन (15) सोनी (12) शहबाज (05) तबस्स्मु (16) खसाना (11) मुस्कान (07) भी मूक बधिर है1 यही इस कु नबे की कमजोरी है। इनकी इसी कमजोरी बेबसी एवं लाचारी ने इनको समाज की मुख्य धारा से दूर कर रखा है। बीते दिनों बरसात में इनके  घर का हिस्सा ढह गया। एक अदद आवास के लिये अधिकारियों के पास गुहार लगायी। 

आवास तो दूर आज तक मुआवजे की दो कौडी भी नहीं मिली। शिक्षा की बात सोचना इस परिवार के  लिये खुली आंख से सपने देखने जैसा है। घर के एक-दो बच्चे स्कू ल तो जाते हैं लेकिन सामान्य बच्चों को पढाई जाने वाली भाषा उनकी समझ से परे हैं। पूरा कु नबा सर्दी के  इस मौसम में जमीन पर पुवाल डाल कर उसी में रात गुजारता है। इस कुनबे के लोंगों को तो ये भी नहीं पता कि वे अपनी फरियाद लेकर कहां जायें। गांव में जब कभी कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि आते हैं। तब यह कुनबा आशा के साथ कुछ पाने की उम्मीद लिये दौड़ पड़ता है हालांकि अभी तक उसे निराशा ही हाथ लगी है विकलांगता के  क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं द्वारा भी इन्हें समाज की मुख्य धारा से जोडने की पहल तो दूर यहां तक आना भी गवारा नही समझा। स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसी सरकार की चल रही जनकल्याणकारी योजना इस परिवार के लिये बेमानी है। कुनबे की मुखिया श्रीमती निशा को नौनिहालों के भविष्य तो बहू किस्मतुल को इनके  शादी ब्याह की चिन्ता सताये जा रही है परिवार में दो लोगों को मिल रही विकलांग पेंशन से पूरे परिवार का गुजारा चल रहा है।

 


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