सर्वे: 26 से 50 सीटें जीतेगी AAP, पर पीएम के लिए पहली पसंद मोदी

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Thursday, January 09, 2014-2:54 PM

नई दिल्ली: दिल्ली में परचम लहराने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उतरने की घोषणा कर चुकी आम आदमी पार्टी को देश के बडे महानगरों में 44 प्रतिशत मतदाता वोट देने के इच्छुक है।  एक अंग्रेजी दैनिक के सर्वेक्षण के मुताबिक 44 प्रतिशत मतदाताओं का कहना है कि अगले 2014 केलोकसभा चुनाव में उनके क्षेत्र सेआप का उम्मीदवार चुनाव लडता है तो वे उसे वोट देंगे। इसके अलावा 27  प्रतिशत अन्य मतदाताओं का कहना है कि वे आप को वोट कर सकते हैं किंतु यह उम्मीदवार कौन होगा उस पर निर्भर करेगा। तेईस प्रतिशत का कहना है कि वह आप उम्मीदवार को वोट नहीं करेंगे। हालांकि सर्वे के मुताबिक भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी देश के अगले प्रधानमंत्री के लिए सबसे अधिक पसन्दीदा उम्मीदवार है।

सर्वे में कहा गया है कि 58 प्रतिशत मतदाता मोदी को प्रधानमंत्री के लिए सबसे अधिक पसन्द करते हैं। आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दूसरे स्थान पर है लेकिन वह मोदी से कहीं पीछे 25 प्रतिशत लोगों की पसंद है।  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को केवल 14 प्रतिशत प्रधानमंत्री के रुप में देखना चाहते हैं। सीटों के संबंध में 25 प्रतिशत मतदाताओं का कहना है कि आप शून्य से 25 सीटें जीत सकती है जबकि 26 प्रतिशत 26 से 50 सीट जीतने का अनुमान व्यक्त किया है। तैंतीस प्रतिशत का मानना है कि आप 51 से 100 सीट जीत सकते हैं। ग्यारह प्रतिशत आप को 100सीट मिलने और पांच प्रतिशत तो आम चुनाव में बहुमत की बात भी कर रहे हैं।

सर्वेक्षण टाइम्स आफ इंडिया के लिए बाजार अनुसंधान संस्था आईपीएसओएस ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूर, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में किया है।  मुंबई और चेन्नई में मोदी की तुलना में केजरीवाल को प्रधानमंत्री के रुप में ज्यादा पसन्द किया गया है।  मोदी के गृह नगर अहमदाबाद के भी 31 प्रतिशत मतदाता केजरीवाल को प्रधानमंत्री के रुप में देखना चाहते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 8। प्रतिशत लोगों की राय थी कि आप को राष्ट्रीय स्तर पर आना चाहिए। आम चुनाव में आप किसको नुकसान पहुंचायेगी. इस सवाल के जवाब में 3। प्रतिशत ने कहा कि पार्टी भाजपा का नुकसान करेगी जबकि 26 प्रतिशत की राय थी कि कांग्रेस के मतों में सेंध लगायेगी। छब्बीस प्रतिशत का मानना था कि आप दोनों का ही नुकसान करेगी।

चेन्नई जहां दो क्षेत्रीय पाॢटयों का एकछत्र राज है वहां के 44 प्रतिशत लोगों का कहना है कि दोनों क्षेत्रीय दलों को सबसे अधिक नुकसान होगा। आप की संभावनाओं के बारे में पूछे गए सवाल पर 50 प्रतिशत ने कहा कि यह अन्य पाॢटयों से केवल अलग ही नहीं है बल्कि इसी रास्ते पर रहेगी जबकि 24 प्रतिशत का कहना था कि अन्य दलों को यह उनकी राजनीति में बदलाव पर मजबूर कर रही है। छब्बीस प्रतिशत इस राय के थे कि आप अभी अलग नजर आ रही है किंतु इस छवि को लगातार बनाये मुश्किल होगा।


 


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