परीक्षा की पास, नतीजे की नहीं कोई आस

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Thursday, January 09, 2014-2:36 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): आदित्य राणा ने बड़ी मुश्किल से पढ़ाई कर यह सोचा था कि रोजगार मिल जाएगा तो परिवार के कष्ट दूर कर देगा। पिता के पैरालाइज होने से परिवार को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उसने स्टाफ स्लैक्शन कमीशन (एस.एस.सी.) की एक परीक्षा भी पास कर ली। दूसरी में पूरी मेहनत कर परीक्षा दी लेकिन परीक्षा परिणाम लटक गया।

कोई अदालत पहुंच गया तो स्टे हो गया। अब इस चक्कर में एक परीक्षा पास कर चुके उसके जैसे एक लाख से अधिक युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। इन छात्रों ने फेसबुक के जरिए पूरे भारत में फैले ऐसे युवाओं को जोड़ा और फिर खड़ा कर दिया एक आंदोलन। इन छात्रों ने बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन एस.एस.सी. को नींद से जगाने का प्रयास किया।

एस.सी.सी.  सी.जी.एल.ई. प्रोटेस्ट 2013 के नाम से फेसबुक पर बने इस ग्रुप में संैकड़ों युवा जुड़ चुके हंै। इस ग्रुप में शामिल युवा अरुण पराशर ने बताया कि एक लाख 31 हजार युवाओं ने वर्ष 2013 में एस.सी.सी. के पहले लेबल की परीक्षा पास कर ली। इन्हें सितम्बर में दूसरी परीक्षा में बिठाया गया लेकिन इनका रिजल्ट लटक गया। इन छात्रों को न कहीं नौकरी मिली और न रोजगार का कोई अन्य जरिया है। लिहाजा इन्हें बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अरुण के मुताबिक एक छात्र ने अदालत से स्टे तो लिया, लेकिन उस स्टे पर एससीसी ने अपना पक्ष सही से नहीं रखा। इस लापरवाही की सजा एक लाख से ज्यादा युवाओं को मिल रही है।

युवाओं के इस ग्रुप में शामिल वैशाली बंसल, गौरव राणा, राज सिंह, प्रखर सहित सभी का एक ही कहना है कि एसएससी को अदालत में अच्छे से पैरवी करके स्टे हटवाकर परीक्षा परिणाम घोषित करना चाहिए। युवाओं का कहना था कि एससीसी की कई परीक्षाओं के परिणाम रुके हुए है। इस कारण नई भर्तियां भी नहीं हो पा रही है। इस कारण इनकम टैक्स इंस्पेक्टर, एक्साइज इंस्पेक्टर, सीबीआई में सब इंस्पेक्टर, कस्टम ऑफिसर, विजिलेंस जैसे विभागों में रिक्तियां बढ़ गई है।

सी और डी ग्रुप के इन पदों पर तैनात सरकारी कर्मचारी ही सरकार के लिए रेवन्यू एकत्र करता है। परीक्षा परिणाम में देरी का असर सरकार के खजाने पर भी पड़ रहा है। युवाओं का कहना था कि फेसबुक के जरिए इन ग्रुप में पीड़ित युवाओं को जोड़ा गया। फिर फेसबुक पर ही तय हुआ कि 8 जनवरी को प्रदर्शन करना है। बस इस आंदोलन की कॉल पर सैकड़ों छात्र जमा हो गए। इन सबका मकसद एक है कि जल्द जल्द उनकी सुनवाई हो। परीक्षा परिणाम रुकने से एसएससी की विश्वनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


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