देहरादून रेल हादसा: डीएनए परीक्षण करेगा मृतकों की पहचान

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Thursday, January 09, 2014-2:42 PM

देहरादून: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में दहानु के पास बांम्बे-देहरादून एक्सेप्रेस में रात करीब 3 बजे आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई। नौ लोगों में से चार की पहचान के लिए उनके शवों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। यह रेलगाड़ी महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के नजदीक ठाणे में हादसे का शिकार हो गई थी। इस बात की जानकारी आज एक अधिकारी ने दी। पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता ने बातचीत के दौरान बताया कि कि शव बुरी तरह जल गए हैं और इसलिए डीएनए परीक्षण का फैसला किया गया है। माना जा रहा है कि घटना का शिकार हुए लोग एस-2 और एस-3 बोगी में सफर कर रहे थे, जिसके साथ-साथ एस-4 बोगी में मंगलवार को आधी रात के बाद आग लग गई थी। बताया जा रहा है कि शव रेलवे पुलिस के पास है जो डीएनए परीक्षण की व्यवस्था कर रहे हैं और इसके बाद शवों को परिवार के हाथों में सौंपा जाएगा।

 इस हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आग लगने के सही कारणों को लेकर असमंजसता खबर लिखने तक बरकरार रही। रेलवे ने मरने वालों के परिजनों को 5-5 लाख रूपए मुआवजे की घोषणा की है। इस अग्निकांड में ट्रेन संख्या 19019 की स्लीपर बोगी एस2, एस3, अस 4 जलकर खाक हो गई। हताहत होने वालों की संख्या बढ़ सकती है। यह हादसा तड़के पौने तीन बजे मुंबई से करीब 170 किलोमीटर दूर दहाणू और घोलवाड स्टेशन के बीच हुआ। रेलवे अधिकारियों के अनुसार 9 मृतकों में एक महिला और 4 पुरूष हैं। बाकी लोगों की पहचान होनी अभी बाकी है।

उन्होंने बताया कि यात्रियों की मौत दम घुटने से हुई। पुलिस ने बताया कि चार लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। आग एक डिब्बे में सुबह लगभग 2 बजकर 50 मिनट पर लगी और जल्द ही यह दो अन्य डिब्बों में फैल गई। उस समय यात्री सोए हुए थे। बताया जा रहा कि फाटक पर तैनात एक गेटमैन ने ट्रेन में आग देखी और तत्काल ही ट्रेन में मौजूद गार्ड को इसकी सूचना दी। गार्ड ने इसके बाद मोटरमैन को सूचित किया, जिसके बाद ट्रेन रोक दी गई। रेलवे सूत्रों के अनुसार गेटमैन की मुस्तैदी से एक बडा हादसा टल गया। ट्रेन को घोलवाड रेलवे स्टेशन पर दहानु मार्ग के पास रोका गया। यहां आग पर करीब दो घंटे बाद काबू पा लिया गया। रेल अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, एस फोर बोगी में मौजूद एक यात्री ने बताया कि आग एस थ्री कोच के पीछे वाले हिस्से में लगी थी। बाद में यह एस टू और एस फोर कोच तक फैल गई। सर्दी होने की वजह से यात्रियों ने खिड़कियां बंद कर रखी थीं, जिसकी वजह से छह यात्रियों की धुएं में दम घुटने से मौत हो गई।
 


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