शीर्ष अदालत ने सहारा से 22 हजार करोड़ रूपए का स्रोत पूछा

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Thursday, January 09, 2014-8:12 PM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज सहारा समूह को चेतावनी दी कि निवेशकों को लौटाये गये 22,885 करोड़ रूपए के स्रोत बताए या फिर सीबीआई और कंपनी रजिस्ट्रार से जांच के लिये तैयार रहे। सहारा समूह ने दावा किया है कि उसने निवेशकों को 22,885 करोड़ रूपए लौटा दिए हैं।

न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय और समूह द्वारा लौटाई गयी राशि का स्रोत बताने से इंकार करने पर उन्हें स्पष्ट संदेश देते हुये कहा कि उसके निर्देशों का उल्लंघन करने के मामले में कार्रवाई के लिये न्यायालय ‘असहाय’ नहीं है। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि सुब्रत राय के विदेश जाने पर लगा प्रतिबंध बरकरार रहेगा।

न्यायाधीशों ने कहा, यह मत सोचिए कि न्यायालय असहाय है। हम सीबीआई और कंपनी रजिस्ट्रार से आपके खिलाफ जांच के लिये कह सकते हैं। हम असहाय नहीं हैं। यदि आप नहीं बताएंगे तो हम धन के स्रोत का पता लगा लेंगे। हम जांच एजेन्सियों से इसका पता लगाने के लिये कहेंगे। न्यायालय को जब पता चला कि सहारा ने सेबी को पत्र लिख कर कहा है कि धन के स्रोत ‘महत्वपूर्ण नहीं’ है तो उन्होंने इससे असहमति व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि कंपनी और राय का आचरण ‘निन्दनीय’ है।

न्यायाधीशों ने कहा, आपकी कंपनी में किसी का यह कहने का साहस हो गया कि स्रोत महत्वपूर्ण नहीं है। यदि आपने धन लौटा दिया है तो आपके पास इस स्रोत का रिकार्ड होगा जहां से आपने धन प्राप्त किया। हम आपसे यह नहीं कह सकते कि जवाब कितना निन्दनीय था। न्यायाधीशों ने कहा, हम आपके प्रति नरमी बरत रहे थे लेकिन आपने इतना बेरूखी भरा जवाब दिया तो क्या किया जाए।

न्यायालय ने कहा कि यह हजारों करोड़ रूपए से जुड़ा मामला है लेकिन समझ में नहीं आता कि पंजीकृत कंपनियां इसका लेखा जोखा क्यों नहीं रखती हैं। न्यायाधीशों ने कहा, यदि आपने लेखा जोखा रखा है तो आप दस मिनट में ही धन के स्रोत का पता लगा सकते हैं। हमने आपके प्रति अत्यधिक नरमी बरती है लेकिन पिछले दो साल में आपने कभी भी सच्चाई पेश नहीं की। आपको धन के बारे में बताना ही होगा। यदि आपने बड़ी भूल की है तो हम आपकी मदद नहीं कर सकते।

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही राय के वकील ने कहा कि 20 हजार करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज सेबी को सौंपे जा चुके हैं और अब उन्हें देश से बाहर जाने की इजाजत दी जानी चाहिए। लेकिन बाजार नियामक सेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द दातार ने इन दस्तावेज और कुछ संपत्यिों की कीमतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दस साल में इनकी कीमत में 8500 फीसदी का इजाफा दिखाया गया है।

इस पर राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुन्दरम ने कहा, मैं इससे अधिक कुछ नहीं कर सकता हूं और मै इससे ज्यादा कुछ नहीं दे सकता। इस पर न्यायाधीशों ने सहारा समूह और राय के आचरण पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें आड़े हाथ लिया। न्यायालय ने कपंनी को धन के स्रोत सहित सेबी द्वारा मांगी गई सारी सूचना 23 जनवरी तक मुहैया कराने का निर्देश देते हुये इस मामले की सुनवाई 28 जनवरी के लिये स्थगित कर दी।

सुब्रत राय ने न्यायालय से उनकी अर्जी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार का अनुरोध करते हुए कहा है कि उन्हें ब्रिटेन और अमेरिका जाने की अनुमति दी जाए। सेबी ने राय, उनकी दो फर्म सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्प लि और सहारा इंडिया हाउसिंग इंवेस्टमेन्ट कार्प लि तथा उनके निदेशकों के खिलाफ तीन अवमानना याचिकायें दायर कर रखी हैं।


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