गन्ने के भुगतान में 2 फीसदी का सुधार

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Thursday, January 09, 2014-8:44 PM

मुजफ्फरनगर (राकेश त्यागी): यू.पी की निजी मिलें सहकारी मिलों के मुकाबले किसानों को उनके गन्ने का भुगतान करने में 15 फीसदी की दर से पिछड़ रही है। बीते कल भुगतान करने की दर 17 फीसदी थी, जिसमें अब 2 फीसदी का सुधार पंजाब केसरी में गुरूवार को प्रकाशित हुई खबर के बाद हुआ है।

यू.पी.शूगर मिल एसोसिएशन से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सहकारी मिलों की तरफ पहले 169 करोड़ , तो वहीं निजी मिलों को 1072 करोड़ का गन्ने के भुगतान का बकाया था। यह बकाया अब घटकर सहकारी और निजी मिलों की तरफ क्रमश: 136 करोड़ और 997 करोड़ रह गया है। निजी मिलों ने गन्ने की खरीद अब तक 2000 करोड़ की। इसमें से अब 1000 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है।

निजी मिलों के मुकाबले सहकारी मिलों ने 15 फीसदी अधिक करीब 65 फीसद गन्ने का भुगतान करके आगे है, जबकि निजी की तरफ 50 फीसदी अभी बकाया खड़ा है। भुगतान में हो रही देरी को लेकर जानकार कहते है कि चालू साल के दौरान यू.पी में कुल 119 गन्ने के मिल चल रही है। इनमें से 95 निजी, तो 24 सहकारी मिल है जबकि 1 कारपोरेशन की है।

यू.पी रोजाना 263 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर देश को रोजाना 21 लाख कुंतल चीनी दे रहा है, लेकिन यह चीनी बाजार में पिट रही है। इसके दाम पिछले साल 29 के मुकाबले अब 28 रूपए किलो रह गए है। इसका कारण बताते हुए गया है कि मराठा क्षत्रप शरद पंवार को यू.पी की मिलें खटक रही है।

केन्द्र में यूपीए सरकार के कद्दावर नेता और शूगर किंग शरद पंवार की देश में स्थापित 2 रिपाईनरी जहां विदेश से आयात की गई सस्ती चीनी को देश के बाजार में धकेल कर महंगी चीनी को बाहर कर रही है। दूसरी तरफ गन्ने से चीनी की रिकवरी महाराष्ट्र के मुकाबले यू.पी में कम है। अभी तक आंकड़े देखे तो यू.पी में चीनी की रिकवरी 8.9 फीसदी है, इसलिए भुगतान में देरी हो रही है।

Edited by:Rakesh Tyagi

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