संगम तट पर बढऩे लगी रौनक, देश भर के साधु-संतों का आगमन शुरू

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Friday, January 10, 2014-3:17 PM

इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में तीर्थराज प्रयाग में लगने वाले माघ मेले में कल्पवास का एक अपना ही महत्व है। कल्पवास के लिए देश के विभिन्न राज्यों से साधु-संतों के आगमन का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे संगम तट की रौनक दिनों दिन बढ़ती जा रही है।

उप्र के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के साथ-साथ दक्षिण भारत के साधु-संतों के आगमन का सिलिसिला शुरू हो चुका है। देश के अलावा विदेशी श्रद्घालु भी प्रयाग पहुंच रहे हैं।  पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही संगम की रेती पर कल्पवासियों का कल्पवास का आरंभ हो जाएगा। मोक्ष की कामना के साथ कल्पवासी यहां सारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर एक माह तक भजन-कीर्तन, दान आदि करेंगे।

संतों की मानें तो मोक्ष की कामना के साथ दुनिया के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रद्घालुओं को इस बार गंगा-यमुना की त्रिवेणी में डुबकी लगाने के लगातार तीन दुर्लभ अवसर मिलेंगे। ज्योतिषाचार्य देवेंद्र प्रसाद इस संयोग को दुर्लभ बताते हुए कहते हैं कि वर्तमान समय में सूर्य दक्षिणायन चल रहे हैं। यह स्थिति 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति तक रहेगी। दक्षिणायन में दिन का समय दैत्यों का व रात्रि देवताओं की होती है, जिस कारण शुभ कार्य वर्जित होते है।

धर्मगुरु स्वामी आनंद गिरि इस अद्भुत संयोग से काफी उत्साहित हैं। वह कहते हैं मानव का कल्याण का ऐसा दुर्लभ संयोग वर्षों बाद आया है। संतो की आस्था के बीच हर वर्ष लगने वाले माघ मेले की रौनक बढ़ती जा रही है। लाखों श्रद्घालओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन की ओर से बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास लगतार जारी है। पूरे मेला परिसर में अलग-अलग चौकियां बनाई जा रही हैं और मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा जा रहा है। श्रद्घालुओं को किसी तरह की कोई परेशानी न हो इसके लिए अस्थायी तौर पर नलकूपों और शौचालयों की व्यवस्था की जा रही है।


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