वीरभद्र सिंह के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोपों की सीबीआई जांच के लिए अर्जी दायर

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Friday, January 10, 2014-11:18 PM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर सीबीआई को यह अंतरिम निर्देश देने की मांग की गयी है कि वह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वर्तमान कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करे।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ में ‘कॉमन कॉज’ नाम के एक गैर-सरकारी संगठन ने यह याचिका दायर की। याचिका में मांग की गयी है कि केंद्रीय इस्पात मंत्री के तौर पर वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में उन पर लगे धनशोधन, आय से अधिक संपत्ति जमा करने और आपराधिक दुर्व्यवहार के आरोपों की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच करायी जाए। सिंह ने आरोपों से इंकार किया है।

जाने-माने वकील प्रशांत भूषण की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जनहित याचिका लंबित रहने के दौरान यह सामने आया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने साई कोठी में 14 जून 2002 को एक पनबिजली परियोजना मेसर्स वेंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित कर दी।

याचिका के मुताबिक, ‘‘उक्त कंपनी परियोजना लागू करने में नाकाम रही और राज्य सरकार ने कंपनी को कई दफा अवधि विस्तार दिया। सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने कंपनी को 10 महीने का और विस्तार दिया। असंगत विचारों पर यह फैसला किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने इन आरोपों के बाबत प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है।


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