MP सरकार की विज्ञापन नीति से मध्यम-लघु अखबारों में असंतोष

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Saturday, January 11, 2014-4:18 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश के मध्यम एवं लघु समाचार पत्रों के मालिकों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने आज यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल से विधानसभा स्थित उनके कक्ष में मुलाकात कर प्रदेश के कुछ चुनिंदा समाचार पत्रों को ही निविदा विज्ञापन जारी करने की कथित नीति के प्रति असंतोष प्रकट किया।

प्रतिनिधिमण्डल में शामिल एक्सप्रेस न्यूज समूह के अंकित जैन ने आज यहां एक वक्तव्य में बताया कि मुख्यमंत्री चौहान को बताया गया कि यह निर्णय सरकारी विज्ञापनों में एकाधिकार का लाभ समाचार पत्र समूह विशेष को पहुंचाने तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला है और इससे प्रदेश के सैकड़ों मध्यम एवं लघु समाचार पत्रों का अस्तित्व खतरे में है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि वह जल्द ही संबंधित अधिकारियों से इस बारे में चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री एवं जनसंपर्क मंत्री को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि एक ओर जहां यह सरकार, मीडिया से बेहतर संवाद एवं सम्भाव का वातावरण बनाना चाहती है, वहीं कुछ नौकरशाहों ने मिलकर सरकार की जनसंपर्क नीति का बेड़ा गर्क कर दिया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि गत जुलाई 2013 में एक ऐसा आदेश जारी किया गया, जिससे प्रदेश के करीब 500 मध्यम एवं लघु दैनिक समाचार पत्र संस्थाओं को चोट पहुंचाई गई है। इसके अनुसार लोक निर्माण विभाग सहित अन्य निर्माण विभागों की निविदाओं के विज्ञापन केवल चुनिंदा दो-तीन दैनिक समाचार पत्रों में ही प्रकाशित होंगे, जबकि अब तक ये प्रदेश के 500 से अधिक दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित होते थे। इससे निविदाओं में पारदर्शिता रहती थी।

मुख्यमंत्री को प्रतिनिधिमण्डल ने यह भी बताया कि जनसंपर्क विभाग की विज्ञापन नीति जिसमें विज्ञापन का 35 से 40 प्रतिशत अंश मध्यम एवं लघु दैनिक समाचार पत्रों को दिया जाता था, उसे समाप्त कर दिया गया है। इसके जरिए 20 हजार से अधिक परिवारों के जीवन-यापन पर कुठाराघात किया जा रहा है, जिससे इनमें भारी असंतोष है।
 


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