1993 बम विस्फोट मामलाः संजय दत्त के बाद में एक और दोषी को मिला पैरोल

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Saturday, January 11, 2014-5:31 PM

मुंबई: बीमार पत्नी की देखभाल के लिए अभिनेता संजय दत्त के रिहा होने के कुछ ही दिनों बाद इसी आधार पर 1993 के बम विस्फोट मामले में एक अन्य दोषी को इसी तरह की राहत दी गई है। सरकार ने कल बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि पुणे के उपसंभागीय आयुक्त ने पैरोल पर मुजीब पारकर को एक महीने के लिए रिहा करने का आदेश दिया है ताकि वह अपनी पत्नी की देखभाल कर सके।

कोल्हापुर के कारागार में बंद पारकर ने पैरोल के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले पुणे के संभागीय आयुक्त और बाद में गृह विभाग के अवर सचिव ने उसकी याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि पुलिस ने उसकी रिहाई का विरोध किया है। हालांकि, अदालत ने पुणे के संभागीय आयुक्त से कहा था कि वह पैरोल के लिए पारकर की अर्जी पर पुनर्विचार करे।

उसकी वकील फरहाना शाह ने दलील दी कि पारकर को टाडा अदालत ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। वह आधी सजा पहले ही काट चुका था। उसकी पत्नी अपेंडिसाइटिस से पीड़ित है और उसका ऑपरेशन करने की सलाह दी गई है। अधिवक्ता शाह ने भी इस बात की ओर इशारा किया कि पारकर को इससे पहले एकबार पैरोल पर रिहा किया गया था और उसने अपनी स्वतंत्रता का दुरपयोग नहीं किया था। उसने निचली अदालत की ओर से किसी शर्त का भी उल्लंघन नहीं किया था। अदालत ने पारकर की याचिका का यह कहते हुए निस्तारण कर दिया कि अब याचिका का कोई मतलब नहीं है क्योंकि दोषी को पैरोल दे दी गई है।

इस बीच, एक अन्य घटनाक्रम में जेबुन्निसा काजी ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके पैरोल की मांग की है। जेबुन्निसा को दत्त और पारकर के साथ ही इसी मामले में दोषी ठहराया गया था। 70 वर्षीय जेबुन्निसा पुणे के यरवदा जेल में पांच साल के कारावास की सजा काट रही हैं। उन्हें अक्तूबर 2013 में पैरोल नहीं दिया गया था। उसके बाद उन्होंने नवंबर में गृह मंत्रालय के समक्ष अपील दायर की। चूंकि अपील अब भी लंबित है, इसलिए उन्होंने इसपर जल्द फैसला करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

जेबुन्निसा ने दलील दी है कि उनकी 90 वर्षीय मां बिस्तर पर पड़ी हैं और उन्हें उनकी देखभाल करने की आवश्यकता है। उनकी याचिका पर न्यायमूर्ति नरेश पाटिल की अध्यक्षता वाली पीठ 13 जनवरी को सुनवाई करेगी। जेबुन्निसा को टाडा अदालत ने 1993 के विस्फोट मामले में हथियार और गोला-बारूद रखने के लिए दोषी ठहराया था।


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