कड़कड़ाती सर्दी में तिमारदारों का पनाहगाह बनी ब्लू-लाइन की बसें

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Saturday, January 11, 2014-7:24 PM

नई दिल्ली: किलर लाइन नाम से बेआबरू होकर राजधानी की सड़कों से अलग हुई ब्लू-लाइन बसों के अच्छे दिन आ गए हैं। ये बसें अब दिल्ली की कड़कड़ाती सर्दी में देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुॢवज्ञान (एम्स) में इलाज के लिए आए दूर प्रदेश के मरीज व उनके तिमारदारों का पनाहगाह बन गई है।

एम्स के गेट नंबर 1 पर 4 ब्लू-लाइन बसें चलते-फिरते रैन बसेरे की शक्ल में लगाई गई हैं। बीते वर्षों की यमदूत अब दिल्ली की कड़कड़ाती सर्दी में यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए किसी संजीवनी से कम
नहीं है।

ब्लू-लाइन बस की शक्ल में रैनबसेरा से मिला सहारा :
बिहार के मुजफ्फरपुर की कोमल न्यूरोलॉजिकल समस्या से ग्रस्त है और इसके इलाज के लिए देश के सबसे बड़े अस्पताल अपने पिता एवं मां के साथ आई है। उत्तर प्रदेश के बरेली के मोह्मद कासिम अपनी बेटी शबनम की अजीब बीमारी के लिए पिछले एक महीने से एम्स में डेरा डाले हुए हैं।

बिहार के सीतमढ़ी जिले के शोएब अपने पिता के हृदय की समस्या को इलाज कराने एम्स पहुंचे हैं। यह सभी मरीज एवं उनके तिमारदार पिछले कई दिनों से एम्स के बाहर मैट्रो स्टेशन में पनाह लिए हुए थे। हांड-मांस कंपा देने वाली दिल्ली की सर्दी से बचने के लिए यह जगह माकूल नहीं थी लेकिन अब ब्लू-लाइन बस की शक्ल में रैनबसेरे में ये बड़े आराम से रह रहे हैं और एम्स में अपना इलाज करवा पा रहे हैं।

इन्हें यहां पर एक समाज सेवी संस्था प्रेरणा की तरफ से फ्री में खाना भी दिया जा रहा है। खराब किडनी का इलाज कराने आए एक मरीज के तिमारदार दिनेश मल्लिक ने बताया कि वह एक सप्ताह पहले ही अपने भाई का एम्स में इलाज के लिए आए हैं। उसके भाई की किडनी में कोई दिक्कत है। यहां बैड नहीं मिलने की वजह से मैट्रो स्टेशन के नीचे किसी तरह कड़कड़ाती सर्दी में रात गुजारते थे लेकिन अब बस में जगह मिलने से उनकी परेशानी दूर हो गई है।


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