दहेज हत्या नहीं हत्या का चलाओ केस: हाई कोर्ट

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Saturday, January 11, 2014-11:12 PM

नई दिल्ली : दहेज हत्या के मामले में सजा पाए चार आरोपी राहत पाने की उम्मीद में दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचे थे। लेकिन न्यायालय में मामला उल्टा पड़ गया। न्यायालय ने कहा है कि यह मामला दहेज हत्या नहीं बल्कि हत्या का था। इसलिए निचली अदालत सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या के मामले में फिर से सुनवाई करें।

चारों आरोपियों ने यह कहते हुए अपनी सजा को चुनौती दी थी कि यह दहेज हत्या का मामला नहीं था,बल्कि एक हादसा था। जिसमें विवाहिता की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामले में आरोपी पति यश जैन,सास,वीना जैन,ननदोई प्रशांत जैन व ससुर सुभाष जैन की तरफ से याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

निचली अदालत ने मृतका के पति को उम्रकैद,सास व ननदोई को दस-दस साल कैद व ससुर को सात साल कैद की सजा दी थी। खंडपीठ ने इनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इन आरोपियों पर दहेज हत्या का मामला नहीं बनता है,बल्कि हत्या का मामला बनता है। इसलिए इन चारों के खिलाफ फिर से हत्या का केस चलाया जाए।

निचली अदालत छह माह में इस मामले का फैसला करें। हालांकि स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा इस मामले के फैसले में की गई टिप्पणियों का असर निचली अदालत के फैसले पर नहीं पडऩा चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूण मामला है। जिसमें  28 वर्षीय शालू को विवाह के ढाई साल बाद ही मार डाला गया।

पेश तथ्यों से साबित हुआ है कि विवाहिता शालू की मौत अप्राकृतिक थी और यह एक हत्या थी, जोकि आरोपियों ने मिलकर की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि विवाहिता को जलाने से पहले भोजन में जहर दिया गया था।


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