जनता दरबार में अफरा-तफरी से घबराए केजरीवाल

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Saturday, January 11, 2014-11:23 PM

नई दिल्ली : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बेशक अपनी सुरक्षा को लेकर बार-बार यह कह रहे हैं कि उन्हें पुलिसकर्मियों की कोई जरूरत नही हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि शनिवार को जनता दरबार में अफरा-तफरी मचने पर यदि पुलिसकर्मी घेरा डालकर बाहर नहीं ले जाते, तो उन्हें वहां से सुरक्षित निकालकर कार्यालय तक पहुंचने में काफी फजीहत झेलनी पड़ती।

हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने सचिवालय के बाहर कड़े प्रबंध किए थे। 2 हजार पुलिसकर्मियों के अलावा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सीमा सशस्त्र बल की 2 कंपनियों के 160 जवान भी वहां तैनात थे। इन पुलिसकर्मियों की तड़के ही तैनाती कर दी गई थी।

आम जनता को वहां तक पहुंचने के लिए मैटल डिटैक्टर से होकर गुजरना पड़ रहा था। इसके अलावा काफी संख्या में यातायात पुलिसकर्मी भी तैनात थे, जिनकी सुबह 6 बजे से डयूटी लगी थी। सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन जब अचानक वहां अफरा-तफरी मची, तो वहां तैनात पुलिसकर्मी तक हक्के-बक्के रह गए।

भीड़ को काबू करने के लिए हाथ में लाठियां लेकर खड़े सीमा सशस्त्र पुलिस के जवान तो जरूर जमीन पर लाठी बजाकर लोगों को खदेड़ते हुए दिखे, लेकिन दिल्ली पुलिसकर्मी चाहकर भी कोई कदम नहीं उठा पा रहे थे। शायद उन्हें पहले से ही ऐसी हिदायत दी गई होगी, कि आम जनता के साथ शांति से पेश आना है।

मुख्यमंत्री को इस बात की थेड़ी सी भी जानकारी नहीं थी कि लोग इस कदर सचिवालय से लेकर आई.टी.ओ. फ्लाईओवर तक सड़क पर दूर तक भारी संख्या में लोग वहां पहुंच जाएंगे। यदि पुलिसकर्मी मुस्तैदी दिखाते हुए घेरा बनाकर मुख्यमंत्री केजरीवाल को वहां से बाहर नहीं ले जाते, तो अफरातफरी के बाद वहां भगदड़ मचने में कोई कसर नहीं बची थी।

सचिवालय के बाहर खड़े पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहली बार लगे जनता दरबार में करीब 50 हजार से अधिक लोग आए। अफरातफरी के दौरान सशस्त्र सीमा बल के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ जगहों पर तो लोगों ने अवरोधक ही तोड़ डाले।
      


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