अदालत ने दोस्त की हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी

  • अदालत ने दोस्त की हत्या के दोषी की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी
You Are HereNational
Sunday, January 12, 2014-12:21 PM

मुंबई: बम्बई उच्च न्यायालय ने एक निचली अदालत द्वारा उस 26 वर्षीय व्यक्ति को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है जिसने कलाई की एक घड़ी को लेकर उत्पन्न गतिरोध के बाद अपने मित्र की हत्या कर दी थी। निचली अदालत ने सितम्बर 2003 में इम्तियाज शौकत सैयद को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 मार्च 2000 को सैयद का अपने मित्र इम्तियाज जावेद के साथ झगड़ा हो गया था। जावेद ने उससे एक कलाई घड़ी ली थी और वह उसे वापस करने से इनकार कर रहा था।

 

सैयद ने उसे थप्पड़ मारा जिसके बाद झगड़ा शुरू हो गया। उसके बाद जावेद ने उसे घड़ी वापस दे दी और जाने लगा। यद्यपि सैयद ने उसे वापस बुलाया और उसे चाकू मार दिया। सैयद के वकील अधिवक्ता प्रकाश वाघ ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि उसके मुवक्किल को हत्या के लिए दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए क्योंकि उसका हत्या का कोई इरादा नहीं था। अधिक से अधिक उन्हें गैर इरादतन हत्या के लिए आरोपित किया जा सकता था क्योंकि सैयद ने अपने मित्र पर गुस्से में हमला किया था।

 

यद्यपि न्यायमूर्ति पी वी हरदास और न्यायमूर्ति ए एस गडकरी की खंडपीठ ने कहा कि ‘‘चाकू से हमला झगड़े के दौरान गुस्से में नहीं किया गया था।’’ पीठ ने कहा, ‘‘मृतक ने घड़ी लौटा दी थी और वह वहां से लौट रहा था। आरोपी ने उसे वापस बुलाया और जानबूझकर उसे चाकू मारा । वार का वेग इतना अधिक था कि उससे महत्वपूर्ण अंग क्षतिग्रस्त हो गए और उसकी मौत हो गई।’’


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You