बिहार सिस्टम से सीख सकते हैं सी.एम.

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Sunday, January 12, 2014-1:40 PM

नई दिल्ली (प्रणय प्रियंवद): मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पहले जनता दरबार की जो दुर्गति हुई, उसके बाद आप सरकार के नौसिखिएपन पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में बिहार में नीतिश कुमार की सरकार और उनका जनता दरबार दिल्ली के लिए नजीर बन सकता है। नीतिश का जनता दरबार महीने में 4 से 5 बार तक लगता है। प्रत्येक सोमवार को लोग मुख्यमंत्री के पास पहुंचते हैं और व्यवस्थित तरीके से अपनी शिकायत प्रस्तुत करते हैं। सुबह 10 से साढ़े 10 के बीच मुख्यमंत्री जनता के सामने आ जाते हैं और शाम 5 बजे तक बैठे रहते हैं। इस दौरान वह करीब एक हजार लोगों की बात सुनते हैं और जरूरी दिशा-निर्देश देते हैं।

बड़ी जगह हो और प्रवेश क्रमवार : नीतिश की तरह केजरीवाल को भी बड़ी जगह में दरबार लगाना चाहिए। नीतिश दरबार प्रत्येक सोमवार को लगता है और समय सुबह 10 से इसके साथ बेरीकेडिंग लगाकर लाइन लगवानी चाहिए ताकि लोग बारी-बारी से आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री से तसल्ली के साथ अपनी बात कह सकें। महिलाओं और विकलांगों के लिए अलग से व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
विभागवार सुनवाई: नीतिश के जनता दरबार में प्रवेश करने से ठीक पहले पंजीकरण करने के बाद ही प्रवेश मिलता है। लोग विभाग के अनुसार शिकायत सुनाते हैं।

मुख्यमंत्री की मेज पर व्यवस्था: महिला और पुरुष दोनों तरह के कर्मी तैनात रहते हैं। जो आवेदन लेकर मुख्यमंत्री को देते हैं। 
हर सोमवार का विभाग तय: पहले सोमवार को पुलिस  और जमीन से जुड़े मामले, दूसरे सोमवार को स्वास्थ्य-शिक्षा, तीसरे सोमवार को अन्य विभागों, चौथे सोमवार को कार्यकत्र्ताओं और 5वें सोमवार को उद्योगपतियों का दरबार लगता है। दिल्ली की आप सरकार को भी कुछ इसी तरह की व्यवस्था करनी चाहिए। नीतिश के जनता दरबार की खास बातें: विकलांगों की शिकायत सुनने नीतीश कुमार खुद चलकर उनकी कुर्सी तक जाते हैं। बड़ा हॉल है जहां सैंकड़ों कुर्सियों और पंखों की भी व्यवस्था है। यहीं पर लोग बारी का इंतजार करते हैं। लोगों को सत्तू घोल कर पिलाया जाता है या चाय, बिस्कुट भी मिलता है। शौचालय और पीने के पानी की भी व्यवस्था होती है।

इलाकेवार लगें दरबार

दिल्ली की आबादी पौने 2 करोड़ है। ऐसे में जनता दरबार का समय बढ़ाया जाना चाहिए और पर्याप्त व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। यही नहीं जिस तरह से बिहार या अन्य प्रदेशों में मंत्री अपने-अपने इलाकों में जनता दरबार लगाते हैं, उसी तरह दिल्ली के भी विभिन्न हिस्सों में जनता दरबार लगाया जाना चाहिए।

दरबार का रिवाज पुराना
मुख्यमंत्री द्वारा जनता दरबार लगाकर शिकायत सुनने का रिवाज काफी पुराना है। उत्तर प्रदेश के सी.एम. रहे मुलायम सिंह यादव जनता दरबार से काफी चर्चा में आए थे। इसके बाद मायावती और अब अखिलेश यादव भी जनता दरबार लगा रहे हैं। अन्य प्रदेशों में भी मुख्यमंत्री जनता दरबार लगाते हैं, लेकिन पर्याप्त इंतजाम के साथ।
 


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