गांधीजी चाहते थे राष्ट्रपति भवन को अस्पताल बना दिया जाए

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Sunday, January 12, 2014-1:57 PM

नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी चाहते थे कि रायसीना हिल्स पर बने 340 कमरे के विशाल राष्ट्रपति भवन में अस्पताल खोला जाय लेकिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इसके लिये राजी नहीं हुये हालांकि गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन  तैयार हो गए थे। जाने माने इतिहासकार शंकर घोष की पुस्तक जवाहरलाल नेहरू आटोबायोग्राफी में दर्ज ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक जब देश आजाद हो रहा था तब गांधीजी को चिंता थी कि नई सरकार सादगी से रहे और उसके मंत्री अपने पर फिजूलखर्च करने के बजाय जनता जनार्दन की सेवा पर सरकारी धन खर्च करें। यही सोचकर गांधीजी ने सुझाव दिया था कि गर्वनर जनरल और राज्यों के गवर्नर विशाल महलनुमा आवास को छोड़कर छोटे आवास में रहें।

जब भारत आजाद हुआ तो गांधीजी ने माउंटबेटन से राष्ट्रपति भवन को अस्पताल में बदलने का सुझाव दिया। माउंटबेटन ने उनके सुझाव से असहमति नही जताई। गांधीजी ने माउंटबेटन को पत्र लिखकर आभार भी व्यक्त किया था। लेकिन नेहरू ने सूचित किया कि गवर्नर जनरल के लिये दूसरा उपयुक्त आवास नही ढूंढा जा सका। पुस्तक में लिखा गया है कि यह वैकल्पिक आवास तीन मूर्ति भवन हो सकता था जो ब्रिटेन के कमांडर इन चीफ का आवास हुआ करता था।
 


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