सच्चा धर्म नफरत की बुनियाद पर नहीं हो सकता: PM

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Sunday, January 12, 2014-3:37 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि सच्चा धर्म नफरत और विभाजन पर नहीं, बल्कि सभी धर्मों के सम्मान और सहिष्णुता पर आधारित होता है।स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए सिंह ने कहा, ‘‘स्वामीजी की जयंती मनाने, उनके विचारों और शिक्षाओं का सम्मान करने तथा उनकी स्मृति को सम्मान देने का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक हम उन मूल्यों को नहीं अपनाते हैं जिनकी उन्होंने पैरवी की थी।’’

 

सिंह ने कहा, ‘‘उनका सच्चा और हमारे देश के लिए प्रासंगिक संदेश यही है कि सच्चा धर्म और सच्ची धार्मिकता नफरत एवं विभाजन के आधार पर नहीं हो सकती, बल्कि यह दूसरे धर्मों के लिए परस्पर सम्मान तथा सहिष्णुता पर आधारित होती है।’’

 

शिकागो में 1893 में विश्व धर्म संसद में दिए विवेकानंद के ऐतिहाषिक भाषण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘स्वामी विवकेकानंद ने कहा था कि सांप्रदायिकता, कट्टरता और धर्मांधता इस सुंदर भूमि पर लंबे समय तक रही हैं। उन्होंने इस धरती को हिंसा से भर दिया, अक्सर इसे मानव रक्त से भिगो दिया, सभ्यता को नष्ट कर दिया और संपूर्ण देशों को तहस नहस कर दिया।’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर इस तरह के भयावह दानव नहीं होते तो मानव समाज आज की तुलना में कहीं ज्यादा आधुनिक होता।’’

 

स्वामी विवेकानंद की 150वीं जन्म शताब्दी समारोह के समापन के मौके पर संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी, रक्षा मंत्री एके एंटनी तथा संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी कटोच भी मौजूद थी। विवेकानंद को ‘विश्व का नागरिक’ करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका संदेश बहुत दूर तक गया और दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रेरित किया।

 

सिंह ने कहा कि वह स्वामी विवेकानंद के उस विचार से खुद प्रेरित हुए हैं कि ‘जिन लोगों को वास्तविक धार्मिक अनुभव हुआ है वे उन स्वरूप को लेकर कभी कलह नहीं करते जिसमें अलग अलग धर्मों की अभिव्यक्ति होती है। वे जानते हैं कि सभी धर्मों की आत्मा एक है।’ 

  

उन्होंने विवेकानंद का हवाला देते हुए कहा, ‘‘धर्म के सामंजस्यपूर्ण और बहुलतावादी विचार हिंदुत्व तथा हमारी प्र्राचीन धरती से जुड़ी सभ्यताओं का एक बड़ा योगदान है। वसुधैव कुटुम्बकम के विचार ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया है।’’ उनका यह भी मानना है कि यह एक ऐसा विचार है जिसने भारत और भारतीय विचार को परिभाषित किया।

 

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के सभी धर्म धरती पर शांंति और मानवों के बीच सद्भाव की बात करते हैं।’’

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का आधुनिक भारत के लिए बड़ा योगदान भारतीयों के मष्तिष्क को झकझोरना और उन्हें स्वतंत्रता और स्वाभिमान के साथ जीवन के लिए प्रेरित करना है।


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