CBI को 60 कोयला ब्लाकों के आवंटन में कुछ गलत नहीं मिला

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Sunday, January 12, 2014-3:53 PM

नई दिल्ली: सीबीआई को 60 कोयला ब्लाकों के आवंटन में कोई भी अपराध नहीं मिला है और उम्मीद है कि वह उन्हें उच्चतम न्यायालय की अनुमति के बाद जांच के अपने दायरे से बाहर कर देगी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इसका उस जांच की स्थिति रिपोर्ट में उल्लेख किया जाएगा जिसे एजेंसी कल उच्चतम न्यायालय में दायर करने वाली है।

सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने रिकार्डों का विस्तृत विश्लेषण किया और यह निष्कर्ष निकाला है कि इन कोयला ब्लाकों के आवंटन में कोई भी अपराध नहीं हुआ है। यद्यपि इस बारे में अंतिम निर्णय उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद ही किया जाएगा कि उन्हें उसकी जांच के दायरे से बाहर करना है या नहीं। सूत्रों ने कहा कि 195 कोयला ब्लाकों का आवंटन की जांच की जा रही है जिसमें से सीबीआई ने 16 मामलों को प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री मिली है जो धोखाधड़ी, आपराधिक दुराचरण और भ्रष्टाचार की ओर इंगित करती है जिसके बाद एजेंसी ने प्राथमिकियां दर्ज की।

इसके बावजूद 60 कोयला ब्लाकों के आवंटन के विश्लेषण के दौरान रिकार्ड सही पाये गए और तय नियमों और प्रक्रियाओं से कोई भी विचलन नहीं मिला। सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान एजेंसी ने राज्य सरकारों की रिपोर्टों, दिलचस्पी रखने वाले मंत्रालयों, छानबीन समिति के ब्योरे और लाभ उठाने वाली कंपनियों की ओर से जमा किये गए फॉर्म और दस्तावेजों का विश्लेषण किया। सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने इन कंपनियों के कुछ अधिकारियों को भी बुलाया और वे सीबीआई जांच दल द्वारा उठाये गए सभी सवालों को समझाने में सफल रहे।

सीबीआई ने एएमआर आयरन एंड स्टील, जेएलडी यवतमाल एनर्जी, विनी आयरन एंड स्टील उद्योग, जेएएस इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड, विकास मेटल्स, ग्रेस इंडस्ट्रीज, गगन स्पांज, जिंदल स्टील एंड पावर, राठी स्टील एंड पावर लिमिटेड, झारखंड इस्पात, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, कमल स्पांज, पुष्प स्टील, हिंडाल्को, बीएलए इंस्डस्ट्रीज, कैस्ट्रान टेक्नोलाजीस और कैस्ट्रान माइनिंग के खिलाफ 16 प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सभी प्राथमिकियां 2006 और 2009 के बीच तथा 1993 से 2004 के बीच हुए कोयला ब्लाकों के आवंटनों तथा सरकारी वितरण योजना के तहत दी गई परियोजनाएं की तीन प्रारंभिक जांचों पर आधारित हैं। दो अन्य प्रारंभिक जांच भी हैं जो कि फाइल गुम होने से संबंधित हैं।

सूत्रों ने बताया कि संभावना है कि सीबीआई उच्चतम न्यायालय में कहेगी कि कोयला ब्लाक आवंटन घोटाले से संबंधित सभी फाइलें उसे मिल गई हैं और इस मुद्दे में जांच बंद की जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई भी सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह बात सामने आती हो कि कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने फाइलों को जांच एजेंसी के हाथों में पडऩे से रोकने के लिए कोई आपराधिक या जानबूझकर कोई कृत्य किया। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने करीब छह प्राथमिकियों में जांच पूरी कर ली है और एक अंतिम रिपोर्ट सक्षम अदालत के समक्ष जल्द ही दायर की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि कोई भी आरोपपत्र या क्लोजर रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर ही दायर की जाएगी। कोयला घोटाला मामले की धीमी जांच को लेकर सीबीआई को अदालत की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था जिसने कहा था कि एजेंसी अभी भी ‘‘पहले ही गियर’’ में है और उसे गति बढ़ाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा के नेतृत्व वाली एक पीठ ने कहा, ‘‘आपको (सीबीआई) कुछ गति लानी होगी। आप अभी भी पहले गियर में चल रहे हैं। आपका काम बहुत बड़ा है और इन सभी के तार्किक परिणति पर पहुंचने की जरूरत है।’’


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