भ्रष्टाचार के मामले में डीडीए कर्मचारी को 4 साल की कैद

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Sunday, January 12, 2014-4:51 PM

नई दिल्ली: अनधिकृत निर्माण की अनुमति देने के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत लेने के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण के एक कर्मचारी को 4 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

विशेष न्यायाधीश संजीव जैन ने 52 वर्षीय शशि भानु को 2008 में रिश्वत लेने मामले में चार साल की कैद की सजा के साथ ही उस पर एक लाख रूपए का जुर्माना भी किया है। शशि भानु दिल्ली विकास प्राधिकरण में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सजा का मुख्य उद्देश्य इस अपराध पर अंकुश लगाना है।

भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत निचले तबके से लेकर सर्वोच्च स्तर तक के लोकसेवक इसके दायरे में आते हैं। इसी तरह भ्रष्टाचार भी मामूली रकम से लेकर हजारों करोड़ रूपए की रिश्वत लेने तक फैला हुआ है। अदालत ने भानु को भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत गैरकानूनी तरीके से रिश्वत लेने, आपराधिक कदाचार और पद के दुरूपयोग के अपराध का दोषी ठहराया है। वहीं दिल्ली विकास प्राधिकरण के ही एक अन्य कर्मचारी आर. के शर्मा को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

भानु और शर्मा ने बिन्दापुर में प्राधिकरण के फ्लैट में हुए निर्माण को गिराने का नोटिस जारी नहीं करने के लिये शिकायतकर्ता केवीआई कृष्णन से 8 हजार रूपए की मांग की थी। कृष्णन ने इस मामले की सीबीआई में शिकायत की और कहा कि उसे विस्तारित आवास योजना के तहत 1995 में प्राधिकरण ने फ्लैट आबंटित किया था। 

ढाई मंजिल के निर्माण के लिये किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी उसे इस निर्माण को जारी रखने की अनुमति के लिये रिश्वत मांग रहे हैं। कृष्णन के मुताबिक, जब उसने अधिकारियों को रिश्वत की रकम नहीं दी तो उन्होंने उसे कारण बताओ नोटिस थमा दिया। कृष्णन ने जनवरी 2008 में सीबीआई को इसकी जानकारी दी। सीबीआई ने दोनों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।








 

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