पड़ोसी कानून तोड़ेंगे तो चुप नहीं रहेंगे: बिक्रम सिंह

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Monday, January 13, 2014-4:18 PM

नई दिल्ली: संघर्ष विराम के उल्लंघनों को लेकर पाकिस्तान को कठोर संदेश देते हुए सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने आगाह किया कि अगर पडोसी देश नियम तोडेगा तो भारतीय सेना भी चुप नहीं बैठेगी। जनरल बिक्रम सिंह ने सेना दिवस से पहले अपने वाॢषक संवाददाता सम्मेलन में पाकिस्तान की ओर से होने वाले उल्लंघनों के बारे में यह ताकीद की।

उन्होंने कहा कि अगर पडोसी देश नियमों का पालन करेगा तो हम भी नियम मानेंगे। अगर वे नियम नहीं मानेंगे तो हमें भी नियम तोडने पर मजबूर होना पडेगा। सेना प्रमुख ने कृष्णा घाटी में हुए संघर्ष विराम के उल्लंघन के बारे में कहा कि उन्होंने सैन्य संचालन महानिदेशक लेफ्टीनेंट जनरल भाटिया से कल हाट लाइन पर पाकिस्तानी सैन्य संचालन निदेशक के साथ होने वाली बातचीत में यह मुद्दा उठाने को कहा है।

उन्होंने कहा कि कृष्णा घाटी में आतंकवादियों की गतिविधियां देखी गई थीं और ऐसे में भारतीय सेना ने फायरिंग की। पाकिस्तान की ओर से भी फायरिंग हुई। अलबत्ता जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि यह सोचना सही नहीं है कि भारतीय सेना सीमा पर चुप बैठी है और जवाबी कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट ही देख ली जाए जिसमें उनके दस सैनिकों के मारे जाने की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि  आपके सैनिक सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद हैं और वे हर जरूरी कार्रवाई करते हैं।

जनरल सिंह ने कहा कि दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों की 24 दिसंबर को हुई बातचीत के बाद से नियंत्रण रेखा पर काफी सुधार देखा गया है और तब से लेकर अब तक यह पहला उल्लंघन है। भारतीय सैनिक लांस नायक हेमराज का सिर कटा हुआ वीडियो दिखाए जाने के बारे में सेना प्रमुख ने कहा कि इस वीडियो की प्रामाणिकता की जांच कराई जा रही है। चीन के मोर्चे पर माउंटेन स्ट्राइक कोर के बारे में सेना प्रमुख ने कहा कि सरकार से इसके लिए पूरा वित्तीय समर्थन दिए जाने का भरोसा दिलाया गया है।

उन्होंने कहा कि 17 कोर का गठन एक जनवरी से शुरू हो चुका है और इसके लिए पूरा रोडमैप तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार से हमें शत प्रतिशत वित्तीय समर्थन के प्रति आश्वस्त किया गया है। हम एलओसी और एलएसी पर अपनी क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। यह क्षमता निर्माण किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि देश की रक्षा का जनादेश पूरा करने की खातिर है।

सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि कश्मीर में सेना की मौजूदगी की अभी जरूरत है और सैन्य बल विशेषाधिकार कानून भी कायम रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर में सेना को लेकर कोई भी निर्णय स्थिति पर निगरानी रखने के बाद ही लेना होगा।


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