धुआं और प्रदूषण बन रहा है एलर्जी का कारण

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Monday, January 13, 2014-1:59 PM

नई दिल्ली (निहाल सिंह): धुंध, धुंआ  शारीरिक श्रम की कमी से दिल्ली वाले विंटर एलर्जी की समस्या से जूझ रहे हैं। सर्दी का सबसे ज्यादा असर शरीर के सबसे संवेदनशीला अंग आंख,कान,नाक एवं हृदय पर पड़ता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ सरमन सिंह कहते हैं कि तापमान गिरने के साथ ही वातावरण में वायरस की संख्या भी बढऩे लगती है।

ऐसे में एलर्जी से परेशान लोगों की समस्या वायरल संक्रमण से बढ़ सकती है। खासतौर पर सर्दियों में नाक से जुड़ी एलर्जियों में प्रदूषण मुख्य कारणों में से है। डॉ सिंह कहते हैं कि विंटर एलर्जी में खासतौर पर यदि समस्या की वजह धूल व मिट्टी है तो उपचार के लिए एंटी हिस्टामिनिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। जिनमें यह समस्या लंबे समय से बनी होती है, उनके लिए एंटीएलर्जिक दवाओं या स्टेरॉयड और स्प्रे का उपयोग किया जाता है।

अस्थमा के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन्हेलर इस्तेमाल करना चाहिए।डॉ सिंह कहते हैं कि सर्दी में हृदय संबंधी समस्याएं भी सिर उठाने लगती है। हृदय में जकडऩ महसूस होता है और इसकी वजह से सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। डॉ कालरा कहते हैं कि सामान्य तौर पर एलर्जी नाक से होती है, जिसे नेजल ब्रॉनकियल एलर्जी कहते हैं।

बचाव : घर में अधिक नमी न होने दें, इससे वायरस बढऩे की आशंका बढ़ जाती है। धूम्रपान से बचें। धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के नजदीक बैठना भी एलर्जी से प्रभावित होने वाले व्यक्ति में सांस की तकलीफ और खांसी को बढ़ा देता है।


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