जैसलमेर में मिले डायनासोर के फुटप्रिंटस

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Monday, January 13, 2014-5:48 PM

जैसलमेर: जैसलमेर में जुरासिक काल का अध्ययन करने आए भू-वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता हासिल हुई है। दल को जैसलमेर के थईयात गांव के पास अध्ययन के दौरान गैरालेटर प्रजाति के डायनासोर के फुट प्रिंट मिले है। साथ ही एक अन्य फुटप्रिंट भी मिला है जो यूबरान्टिस गीगान्टिअस प्रजाति के डायनासोर का है।

जुरासिक काल के अध्ययन पर आयोजित नवीं अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस का दल राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. डी के पांडे के नेतृत्व में जैसलमेर में जुरासिक काल के जीवाश्मों की खोज के लिए जैसलमेर आया है। जिसमें विभिन्न देशों से आए वैज्ञानिक शामिल है।  वैज्ञानिकों के अनुसार जैसलमेर का क्षेत्र जुरासिक काल में समुद्र था। ये करीब 180 मिलियन वर्ष पूर्व रहा होगा। इसके तटीय इलाकों में डायनासोर जैसे रेप्टाइल्स की संख्या बहुतायत में रहती थी।

कांग्रेस में डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, पालेण्ड, रसिया, स्लोवाकिया, यूके व भारतीय विश्वविद्यालयों व सरकारी संस्थाओं के 32 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। विभिन्न स्थानों के भ्रमण व विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। वैज्ञानिको ने काहला, कुलधरा, जाजिया, खभा क्षेत्रों का भ्रमण कर वहां पर जुरासिक काल की संभावनाएं भी तलाशी। वैज्ञानिकों ने बड़ाबाग, रुपसी, भदासर, तेजूआ, लौद्रवा क्षेत्र का भ्रमण कर यहां की भूवैज्ञानिक स्थिति का अध्ययन किया।

वैज्ञानिकों को जैसलमेर के समुद्री वातावरण में रॉक सिस्टम के जमाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। दल ने यहां पाए जाने वाले जीवाश्म के आधार पर नए तथ्य प्राप्त किए जिनके आधार पर यहां के प्राकृतिक संसाधनों के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होने की संभावना हैं।


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