इंटर्न के खिलाफ याचिका पर विचार करने से न्यायालय का इंकार

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Monday, January 13, 2014-8:43 PM

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाने वाली कानून की इंटर्न के खिलाफ कार्रवाई के लिए दायर याचिका पर विचार करने से आज इंकार कर दिया।
 
प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा, कि हम याचिका पर सुनवाई करने के पक्ष में नहीं हैं। शर्मा चाहते थे कि इंटर्न और उसके आरोपों का प्रकाशन करने वाली वेबसाइट और दैनिक अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

न्यायाधीशों ने शर्मा को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद कहा, कि हमने आपको पूरी तरह सुना है और यदि आपके पास राहत के लिए कोई अन्य रास्ता उपलब्ध हो तो आप उसका उपयोग कर सकते हैं। शर्मा का कहना था कि इंटर्न द्वारा लगाए गए आरोप और वेबसाइट तथा दैनिक अखबार में उनका प्रकाशन मानहानि करने वाला है।

उनका दावा था कि यह न्यायपालिका की छवि खराब करने की साजिश है और न्यायमूर्ति गांगुली तथा न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की तरह ही दूसरे पूर्व न्यायाधीशों को भी कटु अनुभवों से गुजरना पड सकता है। उनका आरोप था कि पूर्व न्यायाधीशों के खिलाफ यौन उत्पीडऩ के मसले को तूल देने की साजिश को एक अमेरिकी गैर सरकारी संस्था से धन मिल रहा है।

शर्मा की याचिका पर विचार से इंकार के बाद न्यायालय ने अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। वाहनवती ने यौन उत्पीडऩ के बारे मे इंटर्न के आरोपों के बाद मीडिया की खबरों के आधार पर यह याचिका दायर की थी।


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