भारतीय संस्कृति सबसे समृद्ध: दलाईलामा

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Tuesday, January 14, 2014-10:22 AM

रायपुर: बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा है कि भारतीय संस्कृति सबसे समृद्ध संस्कृति है। राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में नागार्जुन दर्शन पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ समारोह में लामा ने कहा कि भारतीय संस्कृति सबसे समृद्ध संस्कृति है। यहां नागार्जुन जैसे महान दार्शनिक और वैज्ञानिक ने तपस्या की। नागार्जुन के विचार सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए हैं।

 

दलाई लामा ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का अनुसरण करता हो, लेकिन उसका आचरण शुद्ध और अच्छा होना चाहिए। सभी धर्मों के बीच सद्भावना और मैत्री का भाव होना चाहिए। यह सब भारतीय संस्कृति में दृष्टिगोचर होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि नागार्जुन केवल दार्शनिक ही नहीं बल्कि एक महान रसायनशास्त्री और औषधिशास्त्र के ज्ञाता थे। उन्होंने सबसे पहले पारद और सोने के भस्म को औषधि के रूप में प्रयुक्त किया।

 

उन्होंने शून्य का अविष्कार कर भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया। इतने बड़े महान वैज्ञानिक और दार्शनिक का छत्तीसगढ़ में लम्बा समय व्यतीत करना हम सभी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव की बात है। सिंह ने कहा कि नागार्जुन द्वारा छत्तीसगढ़ में बिताए गए क्षणों और उनके कार्यों पर शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा शांति के मसीहा हैं। उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, लेकिन वास्तव में दलाईलामा जी ने नोबल पुरस्कार को सम्मानित किया है।

 

उन्होंने शांति की जो जोत जलाई है, उसका लाभ पूरी दुनिया को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से जो निष्कर्ष आएंगे, राज्य शासन उस पर अमल करेगा। संगोष्ठी का आयोजन राज्य शासन के छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल और पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा सारनाथ विश्वविद्यालय के तिब्बत अध्ययन केन्द्र के सहयोग से किया गया है।

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