छत्तीसगढ़ में टमाटर एक रुपये किलो

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Tuesday, January 14, 2014-4:44 PM

बेमेतरा (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में कभी ग्राहकों के चेहरे को गुस्से से लाल करने वाला टमाटर आज उत्पादकों के चेहरे को लाल कर रहा है। बेमेतरा सहित कई जिलों में जहां भरपूर टमाटर उत्पादन होता है, वहां के बाजार में इसका भाव घटकर एक रुपये किलो तक हो गया है और थोक बाजार में तो कीमत एक रुपये से भी नीचे चला गया है। सूबे में पिछले 24 घंटे में मौसम के परिवर्तन के कारण रबी व सब्जी फसल को नुकसान होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

 

चना, धनिया और करायत की फसल में कीट लगने की आशंका है। बदली का प्रभाव दिखने लगा है। इसके चलते टमाटर, फूलगोभी और पत्तागोभी की आवक बाजार में बढ़ गई है। रविवार की शाम बेमेतरा सहित कुछ जिलों में एक रुपये किलो टमाटर बिका। सोमवार की सुबह भी टमाटर में कोई खास उछाल नहीं देखा गया। अन्य सब्जियां 10 रुपये प्रतिकिलो के दाम पर बेची जा रही हैं। कृषि विभाग के अनुसार, जिले में ढाई लाख एकड़ में रबी फसल लगाई गई है। 82 हजार हेक्टेयर में चना, 8 हजार हेक्टेयर में तिवरा, 15 सौ हैक्टेयर में सरसों तथा 3 हजार हेक्टेयर में मटर की खेती की जा रही है।

 

कृषि अधिकारी का कहना है कि प्रतिकूल मौसम के कारण अरहर के फल व फूल लगे पौधे को नुकसान हो सकता है। किसानों को कीड़ों को मारने के लिए थेरोमेन तथा 50 फीसदी अनुदान में कीटनाशक दवाइयों दी जा रही है। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. आर.बी. तिवारी का कहना है कि कम बारिश रबी फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन मौसम चना के प्रतिकूल है। इससे फसल में इल्लियां बढ़ेंगी तथा फसलों को नुकसान होगा। मैनी कीड़े के संबंध में कहा कि ये कीड़े बीज को चूस लेते हैं।

 

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी आर.के. वर्मा का कहना है कि रबी फसल के प्रतिकूल मौसम होने के कारण मनी क्रॉप चना, सरसों व तिवरा में मैनी का प्रकोप बढ़ेगा। बारिश होने पर फसल को नुकसान होगा। टमाटर में कीड़े लगने कि आशंका को देखते हुए किसान जल्दी टमाटर तोड़ रहे हैं, उसी वजह से बाजार में इसके भाव कम हो रहे हैं।


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