आखिर घबरा क्यों रहे हैं केजरीवाल

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Tuesday, January 14, 2014-2:05 PM

नई दिल्ली : दिल्ली सचिवालय के बाहर सड़क पर बैठकर अपने मंत्रियों के साथ जनता दरबार लगाने की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अचानक बैकफुट पर क्यों आ गए हैं? दिल्ली के लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए जनता दरबार लगाने का ऐलान तो काफी जोर-शोर से किया गया था, पर किसकी नजर लग गई।

इसकी मुख्य वजह संभवत: यही मानी जा रही है कि मुख्यमंत्री इस बात का आभास हो गया है कि उनके पास ऐसी कोई जादू की छड़ी नहीं है जिससे वह हर दिल्ली वालों की समस्या का समाधान कर सकेंगे। सूत्रों की मानें तो आप के नेताओं का इस बात का अहसास हो गया है कि यदि दूसरी बार सचिवालय के बाहर सड़क पर जनता दरबार लगाया गया, तो उसमें इतनी भीड़ इकठ्ठी हो सकती है कि मंत्रिमंडल के सदस्यों को वहां बैठना तक दुश्वार हो जाएगा और यदि किसी तरह से दरबार लग भी गया, तो भीड़ फिर से बेकाबू हो सकती है।

दरअसल चुनाव से पहले ही आप के नेताओं ने आम जनता से इतने वादे कर लिए थे कि लोगोंको लगने लगा था कि सरकार बनते ही उनकी सारी समस्याएं एक ही दिन में दूर हो जाएंगी। लेकिन ऐसा होना असंभव है। लोगों की परेशानियों का समाधान होने में वक्त जरूर लगेगा। लेकिन इतना सब्र किसके पास है।

हर कोई अपना काम रातोंरात करवाना चाहता है। सच्चाई यह भी है कि मुख्यमंत्री ही नहीं उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को एक बात अच्छी तरह से पता है, कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश हैं। यहां बहु-प्रशासकीय व्यवस्था है। दिल्ली सरकार से जुड़ी लोगों की समस्याएं तो सरकार दूर कर सकती है, लेकिन दिल्ली पुलिस से सम्बंधित मामलों और दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी भूमि से सम्बंधित मामले का निपटारा उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात है। इसके लिए दिल्ली सरकार केवल केंद्र सरकार पर ही आश्रित है।

आप की सरकार को डर है यदि अगली बार दरबार में इन दोनों महकमों से परेशान लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, तो दिल्ली सरकार के पास कोई जवाब नहीं होगा। बेशक मुख्यमंत्री इस बात को नहीं माने, लेकिन एक खास बात यह भी है कि गुप्तचर एजैंसियों ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को सुरक्षा को पहले से ही खतरा बता रखा है। ताजा अलर्ट में पानी माफिया से उनकी जान को खतरा बताया जा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने केजरीवाल के कौशांबी स्थित आवास पर जैड सुरक्षा मुहैया करवा रखी है।

दिल्ली पुलिस ने भी उनकी सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। आप के नेता इस बात को भलीभांति समझते हैं यदि आगे दरबार लगाया गया और उसमें भारी संख्या में लोग पहुंच गए, तो उसे संभालना मुश्किल हो सकता है। याद रहे कि गत शनिवार को भी बेकाबू भीड़ से घिर जाने पर पुलिसकर्मियों ने मुख्यमंत्री को वहां बैठने से मना कर दिया था। बाद में हालात बिगडऩे पर उन्हीं पुलिसकर्मियों ने तत्काल घेराबंदी कर केजरीवाल को सचिवालय के अंदर तक पहुंचाया था।


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