राम भरोसे है दिल्ली की अदालतों की सुरक्षा

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Wednesday, January 15, 2014-12:19 AM

नई दिल्ली : ग्रेटर नोएडा की एक अदालत में पेशी पर गए एक विचाराधीन कैदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई। यह कोई पहली घटना नहीं है,जब किसी विचाराधीन कैदी को गोली मार दी गई हो। इससे पहले दिल्ली व गाजियाबाद की अदालत में भी इस तरह की घटना हो चुकी है। परंतु इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद कुछ दिन प्रशासन की नींद खुलती है और फिर सबकुछ पहले ही तरह ही चलने लग जाता है। दिल्ली की अदालतों में कुछ जगह सुरक्षा दुरूस्त है तो कहीं जगह काफी लचर है।

वकील का स्टिकर लगे वाहनों की नहीं होती जांच:
साकेत कोर्ट में भी उन वाहनों की जांच नहीं की जाती है, जिन पर वकील का स्टिकर लगा हो। वहीं पैदल आने वाले वकील भी जांच करवाने में आनाकानी करते हैं और पुलिस कर्मी भी इनको जाने देते हैं। ऐसे में इस कोर्ट में भी वकील के भेष में आसानी से अपराधी घुस सकता है।

तीसहजारी कोर्ट:
तीस हजारी इस तरह की घटनाओं की पहले भी कई बार गवाह बन चुकी है। अब कुछ हद तक इस कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है परंतु इस कोर्ट में भी हालात वहीं है कि कई ऐसे द्वार भी है,जिनसे कोर्ट परिसर में आसानी से आया जा सकता है और उन पर कोई चैकिंग नहीं होती है। कोर्ट परिसर में आने वाले वाहनों की जांच की जाती है परंतु उन गाडिय़ों की नहीं,जिन पर वकील के स्टिकर लगे हों,ऐसे में कोई भी अपनी गाड़ी पर वकील का स्टिकर लगाकर कोर्ट परिसर में अवैध हथियार के साथ आ सकता है।

कड़कडड़ूमा कोर्ट :
इस कोर्ट की सुरक्षा तो भगवान के भरोसे ही चलती है। इस कोर्ट में घुसने के मुख्य द्वारों के अलावा कई अन्य ऐसे रास्ते हैं,जिनसे इस कोर्ट परिसर में आसानी से आया जा सकता है,जहां पर जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कोई भी आसानी से इस कोर्ट परिसर में हथियार लेकर घुस सकता है।

द्वारका कोर्ट:
यहां पर सुरक्षा जांच प्रबंध दुरुस्त हैं। यहां पर वाहनों की जांच की जाती है और यहां आने वाले लोगों की भी जांच सही ढंग से की जाती है।
 
पटियाला हाऊस कोर्ट:
यहां पर प्रवेश करने वाले लोगों की जांच की जाती है, मगर उसमें भी काले कोट में अगर कोई वकील प्रवेश करता है तो पुलिसकर्मी जांच करने से परहेज ही करते हैं। ऐसे में अपराधी के लिए यहां पर वकील के भेष में जाना आसान है।

रोहिणी कोर्ट:
इस कोर्ट में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त हैं। यहां पर निगरानी के लिए सी.सी.टी.वी कैमरे भी लगे हैं। इसके अलावा कोर्ट आने वालों की भी कड़ी जांच की जाती है।

क्या कहते हैं चेयरमैन:
कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल बार एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि अदालतों की सुरक्षा एक गंभीर मामला हैं परंतु इस लापरवाही के लिए अकेले पुलिस को भी दोष नहीं दिया जा सकता है।

कुछ पुलिसकर्मी जांच में लापरवाही करते हैं तो कई बार वकील भी जांच कराने में आनाकानी करते हैं। इसलिए वह पुलिस से मिलकर इस मामले में विचार कर रहें है ताकि सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए जा सकें।


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