फिर बाधा बना प्रमोशन में आरक्षण

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Wednesday, January 15, 2014-12:29 AM

नई दिल्ली: ऊपरी सदन से पारित हो चुके अनुसूचित जाति व जनजाति के कार्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण संबंधी बिल एक बार फिर निचले सदन में पारित होने से लटक सकता है। राज्य सभा में सरकार ने बिल के साथ कार्यकुशलता से जुड़ा संशोधन भी पास कराया था जिससे तरक्की देते समय सालाना गोपनीय रिकार्ड का भी ध्यान रखा जाए।

विधेयक को पास होने के बाद यूपीए सरकार इसे अपनी जीत की तरह पेश तो कर रही है, लेकिन दिल्ली के चुनावी समीकरण ने उसे इस बिल को पास कराने में कशमकश में डाल दिया है। सियासी फायदे के लिए लोक सभा में धड़ाधड़ बिल पास कराने वाली यूपीए सरकार को इस विधेयक से चुनावी लाभ नजर नहीं आ रहा है।

बसपा प्रमुख मायावती के लिए राजनीतिक मुद्दा बन चुके इस विधेयक को कांग्रेस पास कराकर चुनावी वाक ओवर नहीं देना चाहती है। साथ में समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह  यादव के विरोध को भांपते हुए भरोसा भी देना चाहती है कि किसी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करेगी। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अब यह समझने लगी है कि उत्तर प्रदेश के दलित उसके साथ नहीं आने वाले हैं। विधेयक का सारा फायदा बसपा को ही मिलेगा।


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