दिल्ली में रिटेल एफ.डी.आई की पतंग तो पहले ही कट चुकी है

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Wednesday, January 15, 2014-2:34 PM

नई दिल्ली (अजीत के. सिंह): आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा दिल्ली में मल्टी ब्रांड आऊटलेट (एम.बी.ओ.) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ.डी.आई.) की मंजूरी को रद्द किए जाने के फैसले का भले ही कई औद्योगिक संगठनों द्वारा विरोध हो रहा हो लेकिन एक सच यह भी है कि एम.बी.ओ. में निवेश के लिए विदेशी कंपनियां रुचि नहीं दिखा रही हैं।  एम.बी.ओ. में एफ.डी.आई. की मंजूरी को डेढ़ साल हो जाने के बाद भी सिर्फ एक ही कंपनी ने अभी तक भारत में निवेश का फैसला लिया है।

टैस्को ने टाटा समूह के साथ मिलकर भारत में करीब 680 करोड़ रुपए के निवेश का फैसला लिया है। हालांकि टैस्को के अलावा किसी और ने निवेश के लिए आवदेन तक नहीं किया है। खास कर दिल्ली सरकार को एफ.डी.आई. से जुड़ा एक भी प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। औद्योगिक संगठन एसोचैम भी इस बात से इत्तेफाक रखता है और कहता है कि दिल्ली सरकार के फैसले से सरकार की आय पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि अभी तक किसी भी कंपनी ने यहां अपना काम शुरू नहीं किया है।

हालांकि अर्थशास्त्री इसे किसी और भी रूप में देख रहे हैं। अर्थशास्त्री डी.एच. पानिंदकर कहते हैं ‘ एम.बी.ओ. में एफ.डी.आई. को मंजूरी मिले भले ही डेढ़ साल का वक्त हो गया है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से गुजर रही थी और ऐसे में अगर एक भी कंपनी ने निवेश का फैसला लिया है तो इसे खराब संकेत नहीं कहा जा सकता।’

बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि चूंकि अभी सिर्फ 12 राज्यों ने ही एम.बी.ओ. में एफ.डी.आई. की मंजूरी दी है निवेशकों को अभी बहुत ज्यादा आकर्षित नहीं किया जा सकता। हालांकि अर्थशास्त्री डॉ. अनुश्री सिन्हा का मानना है की एमबीओ में एफ.डी.आई. को आने में अभी लंबा वक्त लग सकता है क्योंकि बड़ी कंपनियों द्वारा भारत में सुपर मार्कीट स्टोर के कांसेप्ट पर चलाए जा रहे ज्यादातर स्टोर अभी घाटे में हैं।


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