स्कूलों में सुविधाएं तो बढ़ी पर पढ़ाई निराशाजनक: अहलूवालिया

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Thursday, January 16, 2014-11:35 AM

नई दिल्ली: योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून लागू होने के बाद देश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं तो बढी हैं पर बच्चों की पढाई आश्चर्यजनक रूप से निराशाजनक है। अहलूवालिया ने कल यहां शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख गैर सरकारी संगठन (प्रथम) की वार्षिक रिपोर्ट (असर 2013) को जारी करने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेयजल, शौचालय आदि की सुविधाएं बढ़ी हैं और वह काफी संतोषजनक हैं लेकिन जहां तक बच्चों में पढ़ाई का मामला है यह आश्चर्यजनक रूप से निराश करने वाला है।

 

छठी कक्षा से 8वीं कक्षा के 40 प्रतिशत बच्चे ही भाग कर पाते हैं और 34 प्रतिशत बच्चे तो किताबें पढ़ ही नहीं पाते। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा का राष्ट्रीय औसत खराब नहीं है लेकिन ग्रामीण एवं शहरी इलाकों के बीच अन्तर काफी है क्योंकि अभी शिक्षा पूरी तरह समावेशी नहीं बन पाई है। उन्होंने इस बात पर भी चिन्ता जाहिर की कि ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला बढ़ रहा है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के कारण छात्रों का दाखिल तो बढा है पर स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति अलग है।

 

उन्होंने कहाकि केरल तथा तमिलनाडु एवं आंध्रप्रदेश में प्राइवेट-स्कूलों में दाखिले में वृद्धि तो हुई पर बिहार जैसे राज्यों में कम है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूलों में जवाबदेही अधिक है लेकिन सरकारी स्कूलों में जवाबदेही कम रहती है। अहलूवालिया ने यह भी कहा कि शिक्षकों में प्रशिक्षण के अभाव तथा पाठ्यक्रमों के बोझ एवं छात्रों को अगली कक्षा में बिना परीक्षा की पदोन्नति के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ा है।

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