'राहुल स्वीकार करें या न करें, लेकिन वह हमारे PM उम्मीदवार'

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Thursday, January 16, 2014-6:51 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्लूसी) की महत्वपूर्ण बैठक आज यहां शुरू हुई। पार्टी के अनेक नेताओं का कहना है कि वे विचार विमर्श के दौरान राहुल गांधी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का मुद्दा उठाने जा रहे हैं। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक शुरू होने से पहले पार्टी के अनेक नेताओं ने कहा कि पार्टी की नीति निर्धारित करने वाली इस शीर्ष इकाई की बैठक में यह मुद्दा उठने वाला है और वे इसे उठाने वाले हैं।

इस बैठक से कुछ ही घंटे पहले केन्द्रीय मंत्री आस्कर फर्नाडिस ने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सड़क परिवहन मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा, राहुल स्वीकार करें या न करें, लेकिन वह हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इस शीर्ष पद के लिए राहुल गांधी की उम्मीदवारी की कल घोषणा की जाएगी, तब उन्होंने कहा, ‘‘कल तक इंतजार कीजिए।’’

उन्होंने इसपर वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद होने की बात का खंडन किया। उन्होंने कहा, नहीं, कोई मतभेद नहीं है। हम सभी खुश हैं। लंबे समय तक पार्टी संगठन में रहे फर्नांडीस से जब यह पूछा गया कि कांग्रेस में इस विषय पर भिन्न-भिन्न राय के बीच कैसे उनके नाम को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के रूप में औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा, तब उन्होंने कहा, यह तो करना है। पिछले कुछ दिनों में इस विषय पर अंतर्विरोधी संकेत आ रहे हैं। जहां कुछ नेता संकेत दे रहे हैं कि राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाना चाहिए वहां कुछ संभलकर बोल रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी उम्मीद है कि एआईसीसी की बैठक में ऐसी घोषणा हो जाएगी। उन्होंने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि ऐसा होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस इस चुनाव में जरूर अच्छा प्रदर्शन करेगी। हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस शीर्ष पद के लिए अपनी अनिच्छा से दूर हटते नजर आए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस का सिपाही हूं। मुझे जो भी आदेश दिया जाएगा, मैं उसका पालन करूंगा। कांग्रेस जो चाहेगी, मैं करूंगा।

राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा, मैं कांग्रेस का सिपाही हूं। मुझे जो भी आदेश दिया जाएगा, मैं उसका पालन करूंगा। कांग्रेस जो भी कहेगी, मैं करने को तैयार हूं हमारी पार्टी में फैसले वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिए जाते हैं। हालांकि कांग्रेस में ऐसी सोच हैं कि चुनावों में पार्टी मुश्किल भरे हालात का सामना कर रही है और ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि अगर उन्हें ऐसी जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो चुनावों में खराब प्रदर्शन की स्थिति में तोहमत उन्हीं के सर पर जाएगी।

पार्टी नेतृत्व अन्य विकल्पों को भी तौलने में जुटा है। मसलन राहुल को चुनाव अभियान समिति का प्रभारी बनाया जाये और यह भी कि उन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाए। पार्टी में जो लोग इस पक्ष में हैं कि राहुल को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं बनाया जाये उनका कहना है कि कांग्रेस में यह परंपरा नहीं रही है कि चुनावों के पहले प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया जाए।

2009 में अपवाद था जब सोनिया गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी का एक दस्तावेज जारी किया जिसके आवरण पर उनकी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीर थी और उन्होंने अपनी तस्वीर को ढंक कर कहा था कि सिंह उम्मीदवार होंगे। पार्टी नेतृत्व इस परंपरा पर भरोसा कर सकता हैं और चुनाव अभियान की जिम्मेदारी या कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व उन्हें सौंप सकता है। यद्यपि इस बात में कतई शक नहीं है कि एआईसीसी के सम्मेलन में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की जोरदार मांग होगी। एआईसीसी की बैठक की पूर्व संध्या पर हो रही सीडब्लूसी की इस बैठक में कल के सम्मेलन में पेश किये जाने वाले प्रस्ताव के मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा।


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