अमिताभ को मिला लाइफटाईम ग्लोबल एक्सीलेंस सम्मान

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Friday, January 17, 2014-1:06 AM

इंदौरः मध्यप्रदेश के इंदौर  में आज सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को लाइफटाईम ग्लोबल एक्सीलेंस सम्मान अवार्ड प्रदान किया गया। इस दौरान उन्होंने छात्रों को मैनेजमेंट के जरिए सफलता हासिल करने के गुर भी बताए। इंदौर मैनेजमेंट एसोशिएशन द्वारा आयोजित इंटरनेशनल मैनेजमेंट कनक्लेव के दौरान यह अवार्ड प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में आदित्य बिरला ग्रुप की राजश्री बिडला, बिट्रिश उप उच्चायुक्त कुमार अयर सहित कई प्रतिष्ठित कंपनियों के नामी लोग भी मौजूद थे। श्री बच्चन ने अपनी जिंदगी के कुछ रोचक किस्से सभी को सुनाए जिन्हें सुन कर वह मौजूद श्रोता हंस कर लोटपोट हो गए। अमिताभ ने अपने अनुभव सांझा करते हुए कहा कि जब मैने स्नातक किया तब मुझे ये नहीं पता था कि आगे क्या करना हैं यों ही मैं एक दिन चाय कि दुकान पर बैठे था तभी मेरे दोस्त ने कहा कि यार मुझे पता चल गया है कि हमारी परेशानी क्या है। मैने उसे बडी उत्सुकता से देखा और पूछा तब उसने कहा कि हमारी परेशानी यह है कि हमारे माँ बाप ने हमें आखिर पैदा ही क्यों किया।

इसके बाद मैं अपने पिता हरिवंश राय बच्चन के पास गया और मैने उनसे कहा कि अपने हमें पैदा क्यों किया तब मेरे पिता ने मेरी पूरी बात ध्यान से सुनी फिर बिना कुछ कहे अपने कमरे में चले गए मुझे बडी परेशानी हुई कि पिता जी की प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली। रोज कि तरह पिता जी सुबह सैर पर निकल गए और लौटने के बाद उन्होंने एक कविता लिखी और मुझे वह कविता सुनाई जिसका शीर्षक था ..नई रीत दुनिया.. की कशमोकश से घबरा कर मेरा बेटा मुझसे पूछता हैं कि मुझे पैदा क्यों किया .... मेरे पास इस बात का जवाब नहीं.... कि मेरे पिताजी ने मुझसे पूछ कर मुझे पैदा क्यों नहीं किया .... और ना ही मेरे पिताजी से मेरे दादा जी ने पूछ कर उन्हें पैदा किया था। पहले थी अब भी हैं  आगे भी रहेगी शायद ज्यादा और आगे भी रहेगी शायद ज्यादा अब तुम ये नई रीत अदा करना अपने बेटों से पूछकर उन्हें पैदा करना....।

अमिताभ ने कहा कि आज से  50-60 साल पहले सिनेमा देखना सम्भ्रांत परिवार में अच्छा नहीं माना जाता था। लेकिन भारतीय सिनेमा ने कांच कि तरह समाज को सच्चाई दिखाई और दुनिया मैं अपने आप का स्थापित किया मैं भारतीय सिनेमा में बहुत छोटे रूप से जुडे है। अमिताभ ने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि समय कम हैं में उनके बारे में बहुत कुछ कहना चाहता हूं। अमिताभ ने कहा पिताजी ने कविताओं की 60 किताबे लिखी थीं।

अपनी आटोबायोग्राफी लिखी... 1933 मधुशाला लिखी थी। उनका बहुत अच्छा काम था, अपनी कविताओं में उन्होंने शराब, मदिरालय मधुशाला जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। अमिताभ ने अपने पिता कि मधुशाला कि पंक्तियां सुनाई। श्री बच्चन ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि सफलता के लिए असफलता जरुरी है। उन्होंने इसके लिए स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय उनके बैंक खातों का शेष समाप्त हो गया था और उनकी कंपनी के सारे मैनेजर भी फेल हो गए थे, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखे और आज किस स्थिति में हैं सभी जानते हैं। इस दौरान प्रबंध जगत की प्रसिद्व हस्ती डा रामचरण को भी यह अवार्ड देकर सम्मानित किया गया।


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