दो चैनलों के प्रसारण पर रोक सम्बन्धी आरोपों का सत्यापन करें: अदालत

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Friday, January 17, 2014-3:36 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की लखनउ खंडपीठ ने आज राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिये हैं कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पैतृक गांव सैफई में हाल में सम्पन्न हुए महोत्सव की आलोचना करने वाले दो समाचार चैनलों के प्रसारण पर कथित रोक संबंधी आरोपों का सत्यापन करें।  न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा एवं न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की खण्डपीठ ने यह आदेश ‘वी द पीपल’ नामक संस्था की तरफ से दायर जनहित याचिका पर दिया।  याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रिंस लेनिन का आरोप था कि सैफई महोत्सव के दौरान एक हिन्दी तथा एक अंग्रेजी समाचार चैनलों की कवरेज से नाखुश होकर सरकार ने इनके प्रसारण पर रोक लगा दी है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

उधर, राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता आई. पी. सिंह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का यह आरोप बेबुनियाद है और राज्य सरकार की तरफ से दोनों टीवी चैनलों के प्रसारण पर न तो सरकार की तरफ से कोई रोक लगायी गयी है और न ही शासन की ओर से ऐसे कोई निर्देश जारी किये गये हैं। इस पर, याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि अब भी प्रदेश के कुछ जिलों में केबल नेटवर्क के जरिये होने वाला दोनों चैनलों का प्रसारण नहीं हो पा रहा है।  इसके मद्देनजर अदालत ने राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता से कहा कि अब भी कुछ जिलों में इन चैनलों का प्रसारण न होने की शिकायत का सत्यापन प्रदेश के मुख्य सचिव अपने स्तर से कराएं और 22 जनवरी को अदालत को इसकी जानकारी दी जाए।


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